
बिश्नोई धर्मशाला में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से संगीतमयी भगवान शिव कथा के चतुर्थ दिवस गुरु आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी दिवेशा भारती ने बताया कि इस सृष्टि में प्रभु से प्रेम करने वाले बड़े निराले भक्त होते हैं, जो संसार और करतार में ऐसा तालमेल बैठाते हैं, जिनकी प्रशंसा और जय-जयकार सब लोग करते हैं। अगर हम अपनी ओर दृष्टि डालें तो आज वो स्थिरता, वो सुख-शांति हमारे जीवन में नहीं है, जो भक्तों के जीवन में पहले हुआ करती थी। उन भक्तों ने संसार को भी जिया और करतार को भी जिया। हम ना तो संसार को जी पा रहे हैं और ना ही करतार को प्राप्त कर पा रहे हैं।
साध्वी ने आगे कहा कि संसार में मानव जीवन का उद्देश्य ‘ब्रह्मजिज्ञासा’ है अर्थात ब्रह्म को जानने की इच्छा, ईश्वर प्राप्ति ही मानव जीवन का लक्ष्य है। ईश्वर को जानने की जिज्ञासा से ही भारतीय शास्त्र व ग्रंथों की रचना हुई है। व्यक्ति ईश्वर को जानने के लिए संतों और सतगुरु के पास जाकर भक्ति को प्राप्त करे, फिर उसे संपूर्ण सिद्धियों की प्राप्ति होती है। वो भक्त काल और काम पर विजय प्राप्त करता हुआ संसार में मुक्त होकर विचरण करता है। कथावाचक ने कथा के मध्य में भगवान भोलेनाथ के सुंदर भजन भी प्रस्तुत किए।
कथा के दौरान स्वामी सुखदेवानंद ने बताया कि प्रभु की पावन कथा श्रवण करने पर मानव का कल्याण होता है। कथा मानव को मानवता के गुणों से भर देती है। उसमें प्रेम, सौहार्द, करुणा के भावों को जागृत कर देती है। उन्होंने कहा कि ईश्वर निष्पक्ष है, सब पर समान प्रेम और करुणा लुटाने वाला है। कथा के बाद मुख्य अतिथि विधायक विनोद गोठवाल सहित व्यापार मंडल अध्यक्ष हनुमानप्रसाद रोहतकिया, राजू यादव, राजेश बंसल, इंद्रजीत, मनीष कौशिक, डॉ. चंदन जिंदल, डॉ. वेदप्रकाश नारंग, साध्वी निशा भारती, साध्वी चंडा भारती, साध्वी सत्यभामा भारती व सविता भारती ने आरती करवाई। हनुमानगढ़| जंक्शन में रोडवेज डिपो में रोडवेज कर्मचारियों द्वारा शहर की सुख स्मृद्धि, आपसी भाईचारा, यात्रियों की सकुशल यात्रा, दुर्घटना रहित यात्रा, डिपो की आय में वृद्धि की कामना को लेकर 9 दिसम्बर से शुरू श्री अखण्ड पाठ के भोग गुरूवार को डाले गए। इसके पश्चात शहर की सुख समृद्धि की कामना की अरदास की जिसके पश्चात समागम का आयोजन किया गया। भोग के पश्चात आयोजित समागम में कथावाचक बाबा गुरप्रीत सिंह श्रीगंगानगर वाले ने कथा कीर्तन कर संगतों को निहाल किया। गुरु का अटूट लंगर बरताया गया। इस मौके पर लखवीर सिंह लक्खा, प्रीतम सिंह, जलंधर सिंह, महेन्द्र सिंह, केसर सिंह, गुरसेवक सिंह, जगरूप सिंह, पवन छाबड़ा, हरेन्द्र सिंह, अरमन छाबड़ा आदि ने सेवाएं दी।
