
जिले में यूरिया खाद की आपूर्ति डिमांड के मुकाबले कम होने के कारण वितरण व्यवस्था गड़बड़ा गई है। रावतसर और पल्लू क्षेत्र में व्यवस्था बिगड़ने पर कृषि विभाग ने मॉनिटरिंग बढ़ा दी है। अब कृषि विभाग के कार्मिकों की निगरानी में ही खाद का वितरण होगा। संबंधित फर्म पर उपलब्ध स्टॉक और खाद लेने वाले किसानों की संख्या के अनुसार ही टोकन जारी होंगे। यानी किसी फर्म पर 500 बैग खाद है और 250 किसान पहुंच गए तो 2-2 बैग के टोकन जारी होंगे। स्टॉक ज्यादा और किसानों की संख्या कम होने पर 2 की जगह 3 या 4 बैग भी मिल सकेंगे। कृषि विभाग की ओर से सख्ती दिखाते हुए आदान विक्रेताओं को निर्देश दिए गए हैं कि खाद की आपूर्ति होने के बाद विभागीय कार्मिकों की निगरानी में ही वितरण किया जाए।
अगर किसी दुकानदार ने बिना निगरानी खाद वितरित कर दी तो लाइसेंस सस्पेंड किया जाएगा। जानकारी के अनुसार इन दिनों गेहूं, जौ सहित विभिन्न फसलों में किसान सिंचाई कर रहे हैं। सिंचाई के साथ यूरिया का छिड़काव कर रहे हैं। एक साथ डिमांड बढ़ने और आपूर्ति कम होने के कारण किसानों को पर्याप्त यूरिया नहीं मिल रही। इस कारण कृषकों में आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। वितरण व्यवस्था सुचारू रखने के लिए कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक की ओर से सहायक निदेशक हनुमानगढ़, नोहर और भादरा को भी मॉनिटरिंग बढ़ाने और आदान विक्रेताओं के निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कालाबाजारी या गड़बड़ी मिलने पर संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया है। कृषि विभाग टैगिंग करने वालों पर भी सख्ती करेगा। पूर्व में विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में आया था कि कुछ आपूर्तिकर्ता और विनिर्माता कंपनियां यूरिया और डीएपी के साथ सल्फर, बायोपोटाश, हर्बीसाइड, पेस्टिसाइड, सूक्ष्म तत्व मिश्रण तथा बायो फर्टिलाइजर जैसे उत्पादों की टैगिंग कर आपूर्ति कर रही हैं।
यह एफसीओ-1985, उर्वरक संचलन आदेश तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 का स्पष्ट उल्लंघन है। किसी भी प्रकार की टैगिंग पाए जाने पर संबंधित आपूर्तिकर्ता या विक्रेता के विरुद्ध आवश्यक प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। किसानों को डिमांड के अनुसार उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। नियंत्रण कक्ष स्थापित कर मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं। ब्लॉक वार प्रभारी और सह प्रभारी भी लगाए गए हैं। विभाग की टीम बाजारों और वितरण केंद्रों की नियमित जांच भी कर रही है। यदि कोई विक्रेता उर्वरकों के साथ जबरन अन्य उत्पाद बेचने का प्रयास करे या टैगिंग करे, तो इसकी शिकायत तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष पर दर्ज करवा सकते हैं।
जिले में 13 दिसंबर तक कुल 41 हजार 976 मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति हुई है। 5718.7 मीट्रिक टन खाद का स्टॉक बचा है। सोमवार या मंगलवार तक 3728.25 मीट्रिक टन खाद और आएगी। जबकि रबी सीजन में फसलों की बिजाई क्षेत्र के अनुसार कुल 96 हजार 700 मीट्रिक टन खाद की जरूरत है। अब तक हनुमानगढ़ तहसील में 9758 मीट्रिक टन, संगरिया में 7658.8, पीलीबंगा में 7598, टिब्बी में 5688, रावतसर में 4553, नोहर में 3615 और भादरा तहसील में 3105 मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति हुई है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 13 दिसंबर तक हनुमानगढ़ तहसील में 3137 मीट्रिक टन स्टॉक बचा है। इसी तरह संगरिया तहसील में 434 एमटी, पीलीबंगा में 1290 एमटी, टिब्बी में 393 एमटी, रावतसर में 262 एमटी, नोहर में 79 एमटी और भादरा तहसील में 123.66 मीट्रिक टन स्टॉक उपलब्ध है।
^जिले में यूरिया खाद का वितरण विभागीय कार्मिकों की निगरानी में करवाया जा रहा है। खाद की उपलब्धता के अनुसार ही कृषकों को टोकन जारी किए जा रहे हैं। अगर किसी आदान विक्रेता ने बिना विभाग को सूचना दिए या कार्मिक की गैर मौजूदगी में खाद का वितरण किया तो लाइसेंस सस्पेंड किया जाएगा।
