
पीएचईडी की सप्लाई से पानी लेकर बिल नहीं भरने वाले उपभोक्ताओं की असलियत जानने के िलए भास्कर संवाददाता ने गुरुनानक बस्ती, सेतिया कॉलोनी, पुरानी आबादी टावर एरिया, झुग्गी बस्ती, जवाहरनगर सेक्टर पांच, अशोक नगर, नेहरा नगर आदि कॉलोनियों में खुले कनेक्शनों व टंकियों की ओवरफ्लो पाइपों से पानी व्यर्थ बहते पाया। इसका सीधा असर आम लोगों पर भी पड़ता है।
1. व्यर्थ बहता रहता है पानी: जलदाय विभाग की पेयजल लाइन से फ्री (बिल नहीं भरने वाले) का पानी पी रहे वही लोग हैं िजनके यहां कनेक्शन तो हैं लेकिन मीटर नहीं लगे हैं। इनके घरों के बाहर खुले पड़े कनेक्शनों से पानी व्यर्थ बहता रहता है। आम लोग दुखी होते हैं।
2. गर्मी में किल्लत का करते हैं सामना: अकसर छत पर रखी टंकी के भरने पर व्यर्थ में पानी बहाने वाले उपभोक्ताओं को ही गर्मी में पीने के पानी की किल्लत का सामना करना पड़ता है। ये लोग टेल तक पानी नहीं पहुंचने की शिकायत करते हैं और फिर टैंकरों से पानी भेजने की मांग करते हैं।
3. सड़कों का भी होता है नुकसान: पेयजल के खुले कनेक्शनों से पानी व्यर्थ बहता रहने से टेल के उपभोक्ताओं को पानी नहीं मिलने से परेशानी होती है। वहीं, पानी व्यर्थ बहने से सड़कें क्षतिग्रस्त होती हैं, जिससे अन्य लोग भी परेशानी झेलते हैं। गारंटी अवधि की सड़कें तक समय पूर्व टूट जाती हैं।
इनसाइड: राजनीतिक दबाव भी एक कारण : बिजली जानकार बताते हैं कि इस स्थिति का दूसरा बड़ा कारण राजनीति भी है। विभाग के अधिकारी जब कनेक्शन काटने पहुंतचा है तो छुटभैया नेता या जनप्रतिनिधि विभागी कर्मचारियों का विरोध करने लग जाते हैं। मोहनपाल सचदेवा| श्रीगंगानगर शहरी एरिया में बिजली के 90 हजार जबकि जलदाय विभाग के 52 हजार ही उपभोक्ता हैं। यानी 38 हजार परिवार मुफ्त का पानी पी रहे हैं। इन 52 हजार में भी 20 हजार से अधिक उपभोक्ता ऐसे भी हैं जिन्हांेने कनेक्शन तो ले रखा है मगर पिछले 12-15 वर्षों से बिल ही नहीं भर रहे।
अब ऐसे उपभोक्ताओं में बकाया 14.35 करोड़ रुपए की वसूली अगले तीन माह यानी मार्च 2026 तक होनी है। विभाग ऐसे उपभोक्ताओं को नोटिस दे रहा है। पहले चरण में 5 हजार रुपए से अधिक की बकाया राशि वाले 5,000+ उपभोक्ताओं को नोटिस जारी कर बकाया जमा कराने के लिए 7 दिन का समय दिया जा रहा है। इनमें 50 हजार से 2.50 लाख रुपए तक के बकाया वाले उपभोक्ता भी शामिल हैं। बकाया राशि जमा नहीं करवाने वाले उपभोक्ताओं पर जनवरी 2026 से सख्ती भी शुरू होगी। यह सब होने के जानकार बताते हैं कि इस स्थिति के लिए खुद जलदाय विभाग की जिम्मेदार है। ऐसे हालात में समय पर पैसे भरने वाले उपभोक्ता परेशान हैं। क्योंकि कभी इन्हें पेयजल किल्लत तो कभी टूटी सड़कों का सामना करना पड़ता है। एक घर के बाहर खुले में बहता पानी।
