
हनुमानगढ़ वीएम शिक्षा समिति चुनाव में अध्यक्ष पद को लेकर कांटे की टक्कर रही। बालकृष्ण गोल्याण और निवर्तमान अध्यक्ष अजय सर्राफ के बीच पहले राउंड से लेकर 9वें राउंड तक दोनों में आगे-पीछे की स्थिति बनी रही। 10वें राउंड में गोल्याण को जैसे ही 4 मतों के अंतर से विजयी घोषित किया गया तो प्रतिद्वंदी पक्ष ने री-काउटिंग की मांग की। इसके बाद री-काउंटिंग की गई। इसमें एक वोट मतगणना के समय मतपेटी में कम निकला।
खास बात है कि 10 वर्ष पहले भी गोल्याण 4 मतों के अंतर से ही अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। वहीं, एक बार सर्वसम्मति से अध्यक्ष बने थे। इस तरह से 4 का आंकड़ा गोल्याण के लिए दूसरी बार शुभ रहा। वहीं, फूडग्रेन अध्यक्ष पद पर विजयी हुए रामलाल किरोड़ीवाल अध्यक्ष पद पर पहली बार निर्वाचित हुए। किरोड़ीवाल के लिए पहले तो राह आसान नजर नहीं आ रही थी लेकिन मंडी से जुड़े विभिन्न मुद्दों ने चुनावी परिदृश्य मतदान से एक दिन पहले ही बदल दिया।
जातीय समीकरणों को साधते हुए रामलाल किरोड़ीवाल पहली बार अध्यक्ष निर्वाचित होने में सफल रहे। खास बात है कि चुनाव में शत-प्रतिशत 477 व्यापारियों ने मतदान में हिस्सा लिया। चुनाव प्रक्रिया संपन्न करवाने में सहायक चुनाव अधिकारी एडवोकेट वतनदीप सिंह, शिवराज सिंह खोसा, शिवराज बराड़, गुरप्रीत बराड़, शमशेर सिंह संधू, पवित्र सिंह खोसा, देवेंद्र सिंह ढिल्लो, रामकुमार सहारण, प्रदीप सिंह खोसा आदि की विशेष भूमिका रही। यह चुनाव भले ही व्यापारिक संस्थाओं का था लेकिन इसमें राजनीति हनुमानगढ़ के दो राजनीतिक परिवारों के इर्द-गिर्द रही। इसमें विधायक गणेशराज बंसल के खास सिपहसालार बालकृष्ण गोल्याण के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका था।
यही कारण है कि गोल्याण को जीताने के लिए विधायक के सलाहकार अमित महेश्वरी, पूर्व अध्यक्ष संतराम जिंदल सहित अन्य समर्थक सियासी दांव-पेच के साथ एक-एक वोट पर फोकस बनाए हुए थे। इसमें जातीय समीकरण भी साधे गए। वहीं, अजय सर्राफ के लिए पूर्व सभापति राजकुमार हिसारिया सहित अन्य समर्थक भी सक्रिय भूमिका में थे। इस बीच नेताओं ने परिचितों को समर्थकों के लिए कॉल भी किए। वहीं, फूडग्रेन अध्यक्ष पद के लिए निवर्तमान अध्यक्ष नरोतम सिंगला तो रामलाल किरोड़ीवाल के लिए किंगमेकर की भूमिका में रहे। खास बात है कि इस चुनाव में पहली बार मतदान से लेकर मतगणना की वीडियोग्राफी करवाई गई। टाउन मंडी के व्यापारियों में हर बार चुनाव में मुख्य मुद्दा गेहूं खरीद में एफसीआई से जुड़ा रहता है। बारदाना वितरण, लिफ्टिंग और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर व्यापारियों को समस्या नहीं आए इसलिए फूडग्रेन के पदाधिकारियों पर दारोमदार रहता है। फूडग्रेन मर्चेंट्स एसो. की ओर से धर्मादा राशि से वीएम शिक्षा समिति और गोशाला को सहयोग किया जाता रहा है।
पूर्व में फूडग्रेन ही एकमात्र सर्वमान्य संस्था थी जिसका सालाना लाखों का टर्नओवर रहता था और यह संस्था शहर की अन्य संस्थाओं को भी आर्थिक सहयोग देती थी। पिछले करीब चार वर्षों से तीन और संस्थाएं अस्तित्व में आ गई लेकिन उन संस्थाओं के सदस्य व्यापारी भी फूडग्रेन में सदस्यता बनाए हुए हैं। वहीं, वीएम शिक्षा समिति की ओर से दो स्कूल एवं एक कॉलेज का संचालन किया जा रहा है जहां हर वर्ष कई जरूरतमंद छात्राओं की लाखों रुपए फीस भी माफ की जाती है।
वीएम शिक्षा समिति अध्यक्ष बालकृष्ण गोल्याण ने कहा कि समिति का मूल उद्देश्य शिक्षा है और यही उसकी आत्मा रहेगी। जरूरतमंद परिवारों की बच्चियों की शिक्षा में कोई बाधा नहीं आए यह पहली प्राथमिकता रहेगी। फूडग्रेन अध्यक्ष रामलाल किरोड़ीवाल ने कहा कि व्यापारियों ने जिस विश्वास के साथ नेतृत्व सौंपा है उसका पूरी निष्ठा से निर्वहन किया जाएगा। मंडी और व्यापारियों की समस्याएं हल करवाते हुए संस्था हित में कार्य पहली प्राथमिकता रहेगी।
