
हनुमानगढ़ राजकीय आत्मनिर्भर मंदिर श्रीगोगाजी गोगामेड़ी में नववर्ष मेला-2026 के अंतर्गत 29 दिसंबर से 2 जनवरी तक आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में बुधवार को पंच-गौरव कार्यक्रम (एक जिला–एक पर्यटन) के तहत आयोजन हुआ। इस दौरान निकाली गई विशाल शोभायात्रा और लोक कला संस्कृति की रंगारंग प्रस्तुतियों ने गोगामेड़ी को उत्सव और आस्था के संगम में बदल दिया। सुबह गोरख टीला से आरंभ हुई शोभायात्रा श्रीगोगाजी मंदिर तक पहुंची। शोभायात्रा में सजे-धजे ऊंटों का काफिला, पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित कलाकार और ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते दल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
पंच-गौरव का बैनर लिए हुए सूरतगढ़ का मश्क वादन दल, बीकानेर का सजे-धजे रोबीले ग्रुप, शेखावाटी अंचल की प्रसिद्ध चंग-ढप कला, सरदारशहर के डेरू ग्रुप द्वारा गोगाजी की स्तुति, चूरू के पाबुसर का ढोल-थाली ग्रुप, व बीकानेर ग्रुप द्वारा कच्छी घोड़ी लोक नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कालबेलिया नृत्य की प्रस्तुति देते कलाकार। भजन संध्या में थिरके श्रद्धालु कार्यक्रम श्रृंखला में मुख्य मंदिर के पास स्थित कार्यक्रम स्थल पर सायं 7 बजे से भजन संध्या आयोजित की गई। इसमें स्थानीय लोक कलाकारों द्वारा बीन, भपंग और बांसुरी की जुगलबंदी के साथ गोगाजी की महिमा का बखान किया। बीकानेर और अजमेर के कलाकारों द्वारा राजस्थानी लोक गायन और घूमर नृत्य प्रस्तुत किया।
मश्क वादन, कच्छी घोड़ी लोक नृत्य, पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सजे रोबीले कलाकारों का स्वागत नृत्य तथा पंजाबी लोक नृत्य भांगड़ा भी मुख्य आकर्षण रहें। नववर्ष पर फूलों और गुबारों से सजा गोगामेड़ी का मंदिर परिसर। शोभायात्रा के मंदिर परिसर पहुंचने पर महंत रूपनाथ ने विशिष्ट अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भादरा विधायक संजीव बेनीवाल, उपखंड अधिकारी एवं मेला मजिस्ट्रेट नोहर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गीता चौधरी, उपाध्यक्ष संजीव कटेवा, थानाधिकारी संतोष, पूर्व सरपंच मागु सिंह, देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त ओमप्रकाश अपनी टीम सहित तथा जिला पर्यटन अधिकारी बीकानेर पवन कुमार शर्मा मौजूद रहे।
प्रशासन व पुलिस की ओर से सुरक्षा व व्यवस्थाएं की गई। इसी दिन सायंकाल आयोजित सांस्कृतिक संध्या में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आमंत्रित लोक कलाकारों ने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रस्तुतियां दीं। सर्वप्रथम बाड़मेर के सुफी बैंड ने ढोल, भपंग, मोरचंग और खड़ताल की जुगलबंदी के साथ सुफी गायन प्रस्तुत किया। इसके बाद बीकानेर का भवाई लोक नृत्य, जोधपुर का कालबेलिया नृत्य, किशनगढ़ (अजमेर) का सुप्रसिद्ध चरी लोक नृत्य, सरदारशहर के डेरू ग्रुप द्वारा गोगाजी स्तुति भजन और श्रीगंगानगर के पंजाबी भांगड़ा दल की प्रस्तुति ने समां बांध दिया।
