
हनुमानगढ़ नए साल की शुरुआत कड़ाके की ठंड के साथ होगी। बुधवार सुबह से ही तेज सर्दी ने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया। दोपहर बाद कई क्षेत्रों में बूंदाबांदी की गतिविधियां दर्ज की गई, इसी के साथ आसमान में बादल छाए रहने और धूप नहीं निकलने से हाड कंपाने वाली सर्दी का दौर शुरू हो गया है।
बुधवार को सुबह की शुरुआत कोहरे के साथ हुई। तापमान की बात करें तो 7 डिग्री न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। जो बीते कुछ दिनों से 11-12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा रहा था। वही, उच्चतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जोकि 2 दिन पहले 25 डिग्री सेल्सियस था। बता दें कि मौसम विभाग ने 3 जनवरी तक बारिश और कोहरे का अलर्ट जारी किया है, जिससे आने वाले दिनों में ठंड और अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
धूप की कमी के चलते अधिकतम तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है। वहीं, मौसम में हो रहे इस लगातार उतार-चढ़ाव का असर अब सेहत पर भी दिखने लगा है। बदलते मौसम के कारण मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बच्चे और बुजुर्ग खासतौर पर वायरल संक्रमण की चपेट में हैं। जिला अस्पताल समेत निजी चिकित्सालयों में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे मौसम में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। रात्रि के दौरान एक खेत में छा रहा कोहरा।
एक्सपर्ट: सुबह और रात की सर्दी तेज होगी, आमजन सावचेत रहें राज्य के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में जनवरी के पहले सप्ताह में मौसम और ज्यादा सख्त हो सकता है। आने वाले तीन दिनों के बाद तापमान में गिरावट दर्ज होने की संभावना है, जिससे सुबह और रात की सर्दी और तेज हो जाएगी। इसके साथ ही कई इलाकों में घना कोहरा भी छाने के आसार हैं, जिससे दृश्यता प्रभावित हो सकती है।
आमजन से सावधानी बरतने, गर्म कपड़े पहनने और विशेष रूप से सुबह-रात यात्रा में सतर्क रहने की अपील की गई है। डॉ. राधेश्याम शर्मा, मौसम वैज्ञानिक। एक्सप्लेनर: पाला पड़ा तो सरसों को नुकसान, हल्की सिंचाई से राहत मिलेगी मौसम में आए इस अचानक बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिना कोहरे के तापमान में गिरावट आई तो पाला जमने की आशंका बढ़ जाएगी, इससे सरसों को नुकसान हो सकता है। वहीं, किसान अब मावठ की पहली बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हल्की बारिश होने से फसलों को पाले से बचाव मिल सकता है। रात्रि के समय अगर तापमान 4 डिग्री या इससे नीचे जाए तो किसानों को फसलों में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। इससे पाले से नुकसान की आशंका कम रहेगी।
