
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर शहर में भक्ति का ऐसा सैलाब उमड़ा कि हर राह गुरु के प्रति श्रद्धा के रंग में रंगी नजर आई। रेलवे स्टेशन रोड स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा से शुक्रवार को शुरू हुआ नगर कीर्तन जब नगाड़ों की थाप के बीच शहर के मुख्य बाजारों से गुजरा, तो नजारा देखने लायक था।
नगर कीर्तन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें शहर के 17 अलग-अलग गुरुद्वारों से आए रागी जत्थों ने जब एक सुर में देहि शिवा बर मोहि इहै… और वाहो-वाहो गोबिंद सिंह… के शब्द गायन किए तो संगत मंत्रमुग्ध हो गई। फूलों से सजी पालकी साहिब की भव्यता और उसके आगे चलते पंज प्यारे आकर्षण का केंद्र रहे।
प्रशासन और सेवादारों की मुस्तैदी के कारण 10 किलोमीटर लंबे मार्ग पर व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहीं। आम तौर पर तय समय में पूरा होने वाला यह सफर इस बार 7 घंटे तक चला, क्योंकि संगत का उत्साह चरम सीमा पर था। शहर के हर मोड़ पर संगत पालकी साहिब के दर्शनों के लिए उमड़ पड़ी। गुरुद्वारा प्रधान जितेन्द्र पाल सिंह पाली कोचर ने बताया कि नगर कीर्तन का 80 से ज्यादा जगहों पर इत्र व फूलों की वर्षा से स्वागत किया गया। रणजीत नगारा अखाड़ा गतका पार्टी के 50+ योद्धाओं ने अपनी हैरतअंगेज युद्ध कला और साहस का ऐसा प्रदर्शन किया कि वहां मौजूद दर्शक दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो गए। प्रदर्शन का सबसे रोमांचक हिस्सा वह था जब योद्धाओं ने अपनी आंखों पर नमक डाला और फिर उस पर काली पट्टी बांध ली। पूरी तरह से आंखों की रोशनी बंद होने के बावजूद इन योद्धाओं ने अपनी एकाग्रता और कला के दम पर तलवार से सटीक वार करते हुए केला काटा। उनकी इस एकाग्रता और फुर्ती को देखकर हर कोई दंग रह गया।
तलवारबाजी के बाद शक्ति प्रदर्शन के दौरान योद्धाओं ने हथौड़े से नारियल फोड़ने का साहसी कारनामा किया। यह प्रदर्शन न केवल शारीरिक शक्ति का प्रतीक था, बल्कि इसमें गजब का आपसी सामंजस्य और विश्वास देखने को मिला। इस दौरान हरविंदर सिंह कम्बोज, हरचरण सिंह वासन, प्रभजोत सिंह कामरा, जोगिंदर सिंह, अंग्रेज सिंह, रविंद्र सिंह खालसा, गुरमुख सिंह, राहुल सिंह, नौनिहाल सिंह, स्त्री सत्संग सभा गुरप्रीत कौर अमरजीत कौर, सुरजीत कौर व भुपेंद्र कौर टूरना सहित बड़ी संख्या में संगत मौजूद रहीं। गुरु गोबिंद सिंह जयंती, सिखों के दसवें गुरु के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है ।
गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में बैसाखी के दिन आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की, जो न्याय और निस्वार्थ सेवा के लिए समर्पित एक आध्यात्मिक और सैन्य पंथ के रूप में स्थापित हुआ। गुरु गोबिंद सिंह जी एक धर्मगुरु होने के साथ-साथ महान योद्धा भी थे, जिन्होंने धर्म और न्याय की रक्षा के लिए शस्त्र उठाए, इसलिए उन्हें संत सिपाही कहा जाता है।
उन्होंने खालसा सिखों के लिए पांच अनिवार्य निशानियां बताईं – केश (बिना कटे बाल), कड़ा (लोहे का कंगन), कृपाण (तलवार), कंघा (कंघी) और कच्छा (सूती अधोवस्त्र)। – कमलजीत सिंह सूदन , शिक्षाविद् मुख्य समागम में कल सजाए जाएंगे कीर्तन दीवान, गुरु का अटूट लंगर बरताया जाएगा : गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह ने बताया कि इस अवसर पर 4 जनवरी को श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर आयोजित मुख्य समागम में सुबह 10:30 बजे श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद सुबह 11 से 4 बजे तक महान कीर्तन दरबार सजाया जाएगा।
इसमें श्री दरबार साहिब अमृतसर के हजूरी रागी जत्था गुरदेव सिंह वेरका गुरु जस महिमा का गुणगान करेंगे। इस कड़ी में हजूरी रागी जत्था भाई अलख सिंह सहित अनेक रागी जत्थे संगत को गुरु चरणों से जोड़ेंगे। समागम के दौरान गुरु का लंगर अटूट बरताया जाएगा।
