
राज्य में कार्यरत मिड-डे-मिल वर्कर्स की गंभीर समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मिड-डे-मिल योजना के अंतर्गत कार्यरत रसोइयों एवं कुक कम हैल्परों की दयनीय स्थिति का उल्लेख करते हुए शीघ्र न्यायपूर्ण समाधान की मांग की गई। बताया गया कि मिड-डे-मिल वर्कर्स वर्षों से स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को गर्म व पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें न तो नियमित कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही राज्य के न्यूनतम वेतन का लाभ।
ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान में मिड-डे-मिल वर्कर्स को मात्र 2297 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है, वह भी कई बार 6-6 माह तक नहीं मिलता। अत्यल्प मानदेय और अनियमित भुगतान के बावजूद वर्कर्स पूरी निष्ठा और मेहनत से कार्य कर रहे हैं। इसे श्रमिकों के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की गई।
मिड-डे-मिल वर्कर्स ने मांग की कि 6 माह से लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान किया जाए और भविष्य में हर माह 10 तारीख तक मानदेय देना सुनिश्चित किया जाए। बच्चों को दूध उपलब्ध कराने की योजना के तहत प्रत्येक स्कूल को 500 रुपये की राशि समय पर दी जाए तथा जिन जिलों में दूध की राशि नहीं मिली है, वहां अविलंब भुगतान कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देते हुए न्यूनतम 26 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देने की मांग भी प्रमुख रही।
ज्ञापन में यह भी मांग रखी गई कि सभी स्कूलों में बर्तन साफ करने हेतु सर्फ, साबुन, तौलिया एवं साल में दो जोड़ी ड्रेस उपलब्ध कराई जाए। प्रत्येक स्कूल में दो मिड-डे-मिल वर्कर्स की नियुक्ति की जाए तथा मल्टीटास्क वर्कर्स की भर्ती में मिड-डे-मिल वर्कर्स को प्राथमिकता दी जाए। बंद या मर्ज किए गए स्कूलों के मिड-डे-मिल वर्कर्स को अन्य स्कूलों में समायोजित करने की भी मांग की गई।
वर्कर्स ने सेवानिवृत्ति पर 5 लाख रुपये की एकमुश्त राशि एवं 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने, कार्य के दौरान दुर्घटना पर 2 लाख तथा मृत्यु होने पर 10 लाख रुपये की सहायता राशि देने की मांग रखी। साथ ही मानदेय 10 माह के बजाय पूरे 12 माह देने, स्कूलों को मर्ज या बंद न करने तथा किसी भी मिड-डे-मिल वर्कर की छंटनी न करने की मांग की गई।
इसके अलावा मिड-डे-मिल वर्कर्स को स्थायी कर्मचारी बनाकर ईएसआई और पीएफ लागू करने तथा उनसे स्कूलों में करवाई जा रही बेगार, जैसे सफाई, शौचालय साफ करना व बच्चों के जूठे बर्तन धोने जैसे कार्य तत्काल बंद करने की मांग की गई। ज्ञापन में सरकार से अपेक्षा जताई गई कि वह इन मांगों पर शीघ्र निर्णय लेकर मिड-डे-मिल वर्कर्स को सम्मानजनक जीवन प्रदान करेगी।
इस मौके पर संगीता मंडल, पिंकी मककासर, ललिता, सरिता, पुष्पा, रविता, रीता, विध्या, प्रकाश रोझ, इंद्रा, जसवीर, जसपाल कौर, चंद्रकला, प्रियंका, सर्वजीत कौर व अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
