
न्याय की आस में पिछले तीन दशकों से विभागीय दफ्तरों के चक्कर काट रहे वनकर्मी मनवीर सिंह पुत्र श्री दुल्लाराम मेघवाल, ग्राम डबली कलां (तहसील टिब्बी) ने आखिरकार हताश होकर सोमवार से उप वन संरक्षक कार्यालय, हनुमानगढ़ जंक्शन के बाहर भूख हड़ताल आमरण अनशन शुरू कर दिया। उनके समर्थन में भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने भी धरने को अपना समर्थन दिया। जिला अध्यक्ष मदनलाल मेघवाल ने कहा कि प्रशासन के अधिकारियों से परेशान 32 वर्षों से न्याय के लिए भटक रहा है। उनका कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा और बकाया वेतन सहित सेवा में पुनः बहाली नहीं की जाएगी, तब तक यह भूख हड़ताल जारी रहेगी।
मनवीर सिंह का संघर्ष वर्ष 1992 से निरंतर सेवा मान्यता और वेतन भुगतान को लेकर है। उन्होंने बताया कि श्रम न्यायालय, अतिरिक्त श्रम आयुक्त और यहां तक कि उच्च न्यायालय, जोधपुर तक ने उनके पक्ष में कई बार निर्णय दिए, लेकिन वन विभाग ने अब तक इन आदेशों की विधिवत पालना नहीं की।
उनका कहना है कि श्रम न्यायालय श्रीगंगानगर ने प्रसंग संख्या 125/98 में 28 नवम्बर 2001 को पारित आदेश में उन्हें वेतन सहित बहाल करने और सेवा को 01 जनवरी 1992 से निरंतर मानने का आदेश दिया था। इसके बावजूद विभाग ने आज तक न तो उन्हें सेवा में पुनः लिया और न ही बकाया वेतन का भुगतान किया।
मनवीर सिंह ने बताया कि विभागीय अधिकारियों ने उनकी मांगों को टालने के लिए झूठे मुकदमे तक दर्ज कराए, जिनमें 420, 467, 468, 471 और 120-बी जैसी गंभीर धाराएं लगाई गईं। लेकिन 10 जून 2024 को न्यायालय ने उन्हें सभी आरोपों से दोषमुक्त घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि “एक ईमानदार गरीब कर्मचारी के साथ विभाग ने अन्याय की हद पार कर दी है। 32 साल से न्याय की लड़ाई लड़ते-लड़ते अब मेरे जीवन की सारी पूंजी और उम्मीद खत्म हो गई है। अब न्याय या मृत्यु, यही दो विकल्प बचे हैं।”
मनवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, श्रम मंत्रालय, मुख्यमंत्री, वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक, यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय तक गुहार लगाई, परंतु आज तक किसी स्तर पर उन्हें राहत नहीं मिली। उन्होंने कहा कि “सरकार गरीब मजदूरों और श्रमिकों की बात करती है, लेकिन हकीकत यह है कि एक साधारण कर्मचारी 32 साल से न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है और कोई सुनवाई नहीं हो रही।”
इस स्थिति से नाराज होकर मनवीर सिंह ने कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे अपनी अंतिम सांस तक यही अनशन स्थल पर डटे रहेंगे। उन्होंने सरकार और वन विभाग को चेतावनी दी कि यदि आमरण अनशन के दौरान कोई अनहोनी होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।
