
टाउन मंडी में वर्ष 2026 के दौरान गेहूं की एमएसपी पर खरीद केवल भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से ही करवाए जाने एवं राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 2.25 प्रतिशत आढ़त दर से ही गेहूं की आढ़त का का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग को लेकर फ़ूडग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन हनुमानगढ़ टाउन की ओर से राजस्थान सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री माननीय श्री सुमित गोदारा को ज्ञापन प्रेषित किया गया है। यह ज्ञापन फुडग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलाल किरोड़ीवाल के नेतृत्व में दलीप सिंह ढिल्लों सचिव प्रवीण तलवाड़िया मोंटी कोषाध्यक्ष ह्ररदयाल सिंह राजकुमार सोडा व्यापारियों ने प्रभारी मंत्री को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया कि राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार गेहूं पर आढ़त दर 2.25 प्रतिशत निर्धारित है। “क” वर्ग के दलाल व्यापारी किसानों से गेहूं लेकर एफसीआई के माध्यम से एमएसपी पर खरीद करवाते हैं, जिसके एवज में अन्य कृषि जिंसों की तरह एफसीआई से आढ़त राशि देय होती है। वर्ष 2024-25 में केंद्र सरकार द्वारा गेहूं का एमएसपी 2425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था, साथ ही 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी किसानों को देय था। इस दर पर 2.25 प्रतिशत आढ़त 54.56 रुपये प्रति क्विंटल बनती है, लेकिन एफसीआई द्वारा गत वर्ष की भांति केवल 41.40 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है।
एसोसिएशन ने बताया कि इस प्रकार प्रति क्विंटल 13.16 रुपये की आढ़त राशि कम दी जा रही है, जिससे प्रत्येक व्यापारी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्ष 2025-26 के दौरान टाउन मंडी में एफसीआई द्वारा 14 लाख 35 हजार 4.50 क्विंटल गेहूं की खरीद की गई, जिसके अनुसार 13.16 रुपये प्रति क्विंटल की दर से लगभग 1.89 करोड़ रुपये की राशि व्यापारियों को कम भुगतान की जा रही है।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि एमएसपी पर गेहूं खरीद के लिए एफसीआई जैसी अनुभवी और सक्षम एजेंसी को ही टाउन मंडी में नियुक्त किया जाए। एफसीआई के पास बड़े स्तर पर खरीद, बारदाने की अग्रिम उपलब्धता, मंडी से उठाव, परिवहन, भंडारण एवं किसानों को समय पर भुगतान का पर्याप्त अनुभव है। इसलिए किसी अन्य एजेंसी को टाउन मंडी में नियुक्त नहीं किया जाए।
इसके साथ ही मांग की गई कि गत वर्ष की तरह जनाधार, गिरदावरी एवं जनाधार से जुड़े बैंक खाते के माध्यम से “क” वर्ग दलाल के जरिए गेहूं की खरीद की जाए और बायोमेट्रिक पद्धति लागू न की जाए। अनावश्यक दस्तावेजी बाध्यताओं के कारण किसान गेहूं बेचने से विमुख होकर पड़ोसी राज्यों की मंडियों में बेचने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे राज्य सरकार को राजस्व की हानि होती है।
अंत में फुडग्रेन अध्यक्ष रामलाल किरोड़ीवाल ने मंत्री से आग्रह किया कि वर्ष 2026 में टाउन मंडी में गेहूं की एमएसपी पर खरीद केवल एफसीआई से ही करवाई जाए तथा व्यापारियों को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 2.25 प्रतिशत आढ़त दर का पूर्ण भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
