
श्रीगंगानगर क्षेत्र में बीते छह दिनों से रात का तापमान चार डिग्री सेल्सियस से नीचे रह रहा है। रात में पाळा भी जम रहा है। पाले की मार से फसलों में नुकसान भी हो रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अगेती सरसों व आलू की फसलों में नुकसान ज्यादा होने की आशंका है, लेकिन नुकसान का अंदेशा अभी नहीं लग पा रहा है।
कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो मौसम शुष्क रहने व तापमान में बढ़ोतरी के साथ ही पाळे से इन फसलों में नुकसान के लक्षण दिखने शुरू हो जाएंगे। इसके बाद ही नुकसान का सही आंकलन किया जा सकेगा। रबी सीजन में धनिया, सौंफ, जीरा, सरसों व आलू सबसे ज्यादा संवेदनशील फसल है। इनमें से श्रीगंगानगर क्षेत्र में सरसों व आलू फसल मुख्य रूप से होती है। बीते छह दिनों से रात का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे रह रहा है और रात में पाला भी जम रहा है। पाळे की मार से फसलों में नुकसान भी हो रहा है।
श्रीगंगानगर जिले में अगेती सरसों व आलू की फसलों में पाळे की मार से नुकसान भी हो रहा है, लेकिन नुकसान का अभी आंकलन किया जाना संभव नहीं है। तापमान में बढ़ोतरी होने व मौसम शुष्क होने के साथ ही जहां पाळा जमा है वहां आलू व सरसों की फसलों में नुकसान दिखना शुरू हो जाएगा। रहती है या जहां लंबे समय तक नमी अधिक रहती है वहां सरसों की फसल में तना गलन व सफेद रोली रोग का प्रकोप हो सकता है। ऐसे में किसान निमयित रूप से खेत में फसल का निरीक्षण करें और जहां कहीं भी रोग का प्रकोप देखें वहां विभागीय सिफारिश के अनुसार उपचार करें।
^ इन दिनों रात का तापमान चार डिग्री से नीचे रह रहा है और रात में मौसम साफ रहने से पाळा भी जम रहा है। ऐसे में किसान सचेत रहें तथा फसलों को पाळे की मार से बचाने के लिए रात में फसलों के आसपास सामूहिक रूप से धुआं करें। फसलों में आवश्यकता अनुसार सिंचाई करें। विभागीय निर्देशों के अनुसार फसल को पाळे की मार से बचाने के लिए भी उपचार करें। – मिलंद सिंह, सेवानिवृत कृषि वैज्ञानिक श्रीगंगानगर
सरसों : सरसों की अगेती फसल में इन दिनों फलियों में दाना बनने की अवस्था है। जिन क्षेत्रों में फसल में पाले की मार पड़ी है, वहां तापमान में बढ़ोतरी होने व मौसम शुष्क रहने के साथ ही पौधों की फलियां काली पड़नी व फटनी शुरू हो जाएंगी। फलियों में दाना भी काला पड़ जाएगा। आलू : आलू की फसल में इन दिनों ग्रोथ की अवस्था है। पाले की मार से मौसम शुष्क होने के साथ ही पत्तियां झुलसी दिखेंगी। इससे पौधों की भोजन बनाने की प्रक्रिया अवरुद्ध हो जाएगी और आलू की ग्रोथ रुक जाएगी। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा।
