
हनुमानगढ़ । अनाज मंडी मजदूर यूनियन और एफसीआई पल्लेदार मजदूर यूनियन की संयुक्त बैठक यूनियन कार्यालय जनशक्ति भवन, हनुमानगढ़ टाउन में सीटू के जिला अध्यक्ष कामरेड आत्मा सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में केंद्र व राज्य सरकार की निजीकरण नीतियों तथा अनाज मंडियों में प्राइवेट कंपनियों को सरकारी खरीद सौंपने के प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए अनाज मंडी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष कामरेड रामेश्वर वर्मा ने कहा कि सरकार की निजीकरण नीतियों के तहत देशभर की सार्वजनिक संपत्तियों और कंपनियों को नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन के जरिए 30 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी एफसीआई के गोदाम को रिलायंस कंपनी को दिया गया था, जिसके विरोध में सीटू ने सवा साल तक लगातार धरना-प्रदर्शन किया, जिसके बाद कंपनी को गोदाम छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब हनुमानगढ़ की अनाज मंडियों पर निजी कंपनियों की नजर है, जबकि हनुमानगढ़ को प्रदेश में “धान का कटोरा” कहा जाता है और पिछले वर्ष सरकारी गेहूं की सर्वाधिक खरीद एमएसपी पर यहीं हुई थी।
कामरेड आत्मा सिंह ने कहा कि सरकारी खरीद को निजी कंपनियों को सौंपना भारतीय खाद्य निगम को कमजोर करने और अंततः खत्म करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो खाद्य सुरक्षा योजना पर भी खतरा मंडराएगा, जिसके तहत राशन डिपो के माध्यम से गरीबों को गेहूं वितरित किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निजी कंपनियां न तो किसानों के हित में हैं, न व्यापारियों के और न ही मजदूरों के।
सीटू जिला महासचिव कामरेड शेर सिंह शाक्य ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निजी कंपनियों को मंडियों में प्रवेश दिया गया तो हजारों मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में सरकारी खरीद में एफसीआई के अलावा किसी भी निजी कंपनी को एक भी थैला उठाने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने सरकार के दबाव में मंडियों को अलग-अलग ब्लॉकों में विभाजित कर एक ही मंडी में कई कंपनियों को काम करने की अनुमति दी है, जिससे प्रतिस्पर्धा और विवाद की स्थिति पैदा होगी तथा कार्य सुचारू रूप से नहीं हो सकेगा।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आने वाले दिनों में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। बैठक में सीटू जिला कोषाध्यक्ष कामरेड बहादुर सिंह चौहान सहित बसंत सिंह, बगा सिंह गिल, प्रमोद साहनी, अरविंद मुंशी, जगदीश यादव, शौकत राम, संदीप बसोड़, हरजी वर्मा, श्रीचंद, अमरजीत सिंह, लाभ सिंह, साहब राम, रामचंद्र, बिंटू, शिवकुमार, गुरप्रेम सिंह, सुल्तान खान, वली शेर, वारस अली, लाल सिंह, बूटा सिंह, इसाक खान, लवली, श्यामलाल, बुधराम, राजकुमार, विनोद महावर, जगजीत सिंह, रघुवीर सिंह तथा शिवकुमार पीलीबंगा सहित अनेक मजदूर नेता उपस्थित रहे।
