
हनुमानगढ़। भादरा थाने में पदस्थापित थानाधिकारी हनुमानाराम विश्नोई के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं। बार संघ हनुमानगढ़ एवं भादरा के अधिवक्ताओं ने अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, जयपुर को प्रार्थना-पत्र भेजकर थानाधिकारी पर जातिगत टिप्पणी करने, अभद्र व्यवहार करने और अवैध वसूली करने जैसे आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर अधिवक्ताओं और बार संघ में भी रोष व्याप्त है तथा निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
ज्ञापन में जिला बार संघ अध्यक्ष रोहित खिच्ची ने बताया गया है कि शिकायतकर्ता अदरीश अली ने बताया कि पिछले करीब 37 वर्षों से वकालत के क्षेत्र में कार्यरत हैं और अतिरिक्त लोक अभियोजक के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि थानाधिकारी का व्यवहार आमजन व प्रबुद्धजनों के प्रति लगातार अनुचित रहा है। लोगों को थाने बुलाकर दबाव बनाना, कथित रूप से दलालों के माध्यम से पैसों की मांग करना और बैंक खातों के जरिए राशि मंगवाने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में मानवाधिकार आयोग द्वारा भी संबंधित अधिकारी के खिलाफ आदेश पारित किए जा चुके हैं, जिससे उनके कार्यशैली पर सवाल उठते हैं। अधिवक्ता का कहना है कि ऐसे अधिकारी को फील्ड पोस्टिंग में रखना उचित नहीं है।
एक अन्य आरोप के अनुसार, हाल ही में एक प्रकरण के निस्तारण के बाद थानाधिकारी द्वारा अधिवक्ताओं के प्रति आपत्तिजनक और जातिसूचक टिप्पणी की गई, जिससे अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश फैल गया। वहीं 26 फरवरी 2026 को एक मामले में सुपुर्दगी लेने गए अधिवक्ता के सहयोगी के साथ भी कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया और धमकाने की बात कही गई।
प्रार्थना-पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि एक प्रकरण में जब्ती की पूरी सामग्री दर्ज नहीं कर उसे अपने पास रखने तथा बाद में दलालों के माध्यम से करीब साढ़े तीन लाख रुपये की अवैध वसूली करने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि संबंधित घटनाओं के सबूत के रूप में सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्डिंग उपलब्ध हैं, जिनकी जांच से सच्चाई सामने आ सकती है।
इस पूरे मामले को लेकर बार संघ भादरा ने 27 फरवरी 2026 को निंदा प्रस्ताव भी पारित किया था, जिसका समर्थन जिला बार संघ हनुमानगढ़ और जयपुर बार एसोसिएशन ने भी किया। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर अधिवक्ताओं में नाराजगी है।
शिकायतकर्ता ने एडीजीपी से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए, आरोपी थानाधिकारी को तत्काल फील्ड पोस्टिंग से हटाया जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

