
जयपुर में संत-महंत विरोध में तपस्या करते रह गए और उधर डेयरी प्लांट की तैयारी हो गई। युद्ध के हालात में सऊदी अरब से सीकर लौटे मजदूर को गांव में अलग ‘युद्ध के हालात’ मिले। राजस्थान यूनिवर्सिटी में नंबरों का खेला हो गया और श्रीगंगानगर में कानून के हाथ लंबे और पैर तेज निकले।
राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में..
1. रात के चौपाल में डिप्टी CM पर बरसे संत
संतों को धर्म और पर्यावरण की रक्षा के लिए सुरम्य स्थल चाहिए। नदी का किनारा, पहाड़ की तहलटी आदि। उधर, विकास के लिए कुछ इसी तरह की जगह इंडस्ट्रियलिस्ट को भी चाहिए।
सरकार क्या करे? सरकार दोनों तरफ आश्वासन दे और बीच का रास्ता निकाल ले।
यही बीच का रास्ता तलाशते हुए डिप्टी सीएम साहब ने अपने क्षेत्र के भैराणा धाम में तपस्या कर आंदोलन में लीन संतों को आश्वासन दिया कि समाधान कर देंगे।
संत क्या चाहते हैं? वे चाहते हैं कि उनके धाम के आस-पास रीको इंडस्ट्रियल एरिया न बनाया जाए। इससे धाम की शांति भंग होगी।
उधर, उसी इलाके में डेयरी प्लांट की तैयारी हो गई। अब हालात ये हैं कि संत 25 दिन से ज्यादा की कठोर तपस्या कर चुके हैं। बलिदान की राह पकड़ने तक को तैयार हैं।
डिप्टी सीएम साहब इलाके के बोराज गांव में रात्रि चौपाल करने गए थे। रात चौपट हो गई, क्योंकि वहां संत पहुंच गए। दुर्वासा का रूप धरे हुए थे। डिप्टी सीएम से बोले- हमने आपको समर्थन दिया है। इस मामले में आपका क्या स्वार्थ है?
जयपुर के भैराणा धाम के पास रीको और अन्य इंडस्ट्री के विरोध में संत तपस्या कर विरोध कर रहे हैं। बोराज गांव में रात्रि चौपाल के दौरान डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा पर एक संत ने दोहरे रवैये के आरोप लगाए।
2. राशन डीलर बोला- नहीं दूंगा गेहूं
पेट के लिए परिवार को छोड़कर रामवतार ‘जय महाकाल’ का जप करते हुए सऊदी अरब पहुंच गया। वहां एक केबिननुमा कमरे में अन्य भारतीय मजदूरों के साथ रहकर समय काटने लगा।
परिवार पालने के लिए खुद को खपा रहा था कि युद्ध के हालात बन गए। कंपनियां बंद हो गईं। भारतीयों को घर लौटने के इंतजाम करने पड़े। रामवतार सोशल मीडिया पर ‘यार मैं इंडिया चला’ वाली रील अपलोड कर अपने घर सीकर के श्रीमाधोपुर पहुंच गया।
लेकिन रामवतार को पता नहीं था कि यहां अलग तरह के युद्ध का सामना करना पड़ेगा। वह राशन लेने के लिए राशन डीलर के पास पहुंच गया।
राशन डीलर ने अभी-अभी किसी चहेते को 20 रुपए में गेहूं का कट्टा पकड़ाया था, जिसे वह स्कूटी पर रखकर ले जाने का इंतजाम कर चुका था।
रामवतार ने राशन का गेहूं मांगा तो डीलर अचानक लीडर बन गया और आदेश दिया- भाग जा यहां से।
रामवतार कितना भागेगा। पेट के लिए देश से दूर भाग गया। पेट के लिए राशन की दुकान तक भागा। राशन की दुकान से भी भागने को कहा जा रहा है।
रामवतार चूंकि ‘फॉरेन रिटर्न’ था। इसलिए उसने थोड़ा रौब दिखा दिया। इस पर राशन डीलर ने आपा खो दिया। चिल्लाकर पड़ा-जा, कुछ भी कर ले। नहीं दूंगा गेहूं। नहीं दूंगा।
रामवतार अब कहां जाए? इन्हीं हालात पर सैयद राही साहब ने लिखा है- जाए तो कहां जाए साकी तेरा दीवाना…
सीकर के श्रीमाधोपुर में राशन डीलर ने रामवतार मौर्य को राशन का गेहूं देने से इनकार कर दिया। रामवतार सऊदी में मजदूरी करते थे। युद्ध के हालात के कारण वहां से लौट आए हैं।
3. राजस्थान यूनिवर्सिटी में ‘खेला’
इस वक्त एक चीज सर्वत्र, सर्वविदित, सर्वशक्तिमान है और जगतव्यापी है। वह है- खेला।
यह खेला राजनीति में घुस जाए तो सत्ता अलट-पलट कर देता है। मैदान में घुस जाए तो जीता हुआ मैच हरा देता है। बाजार में घुस जाए तो व्यापार की बैंड बजा देता है।
खेला करने में सिद्धहस्त लोग मलाई का आनंद लेते हैं। पीछे रेला रह जाता है।
इस बार खेला राजस्थान विश्वविद्यालय में हुआ। महाराज कॉलेज के छात्र आकाश कुमावत ने 12वीं में 95% नंबर हासिल किए थे।
तब जाकर उसे एडमिशन मिला था। लेकिन परीक्ष में 3 नंबर की बैक लगा दी गई। अब कराओ रीचेकिंग-रिवैल्यूएशन।
ऐसा ही एक और स्टूडेंट है रोनक विश्नोई। उसने तो 12वी में 97 परसेंट मार्क्स पाए थे। उसे भी मैथ में फेल कर बैक लगा दी।
दोनों छात्र घनचक्कर हो गए। अब तक जिन सब्जेक्ट में D लग रहा था, उनमें फेल?
छात्रों ने आरोप लगाया कि पैसे के लिए बैक लगाई जाती है फिर मजबूरन पुनर्मूल्यांकन कराना पड़ता है और रिजल्ट पास।
बात छात्रनेता शुभम रेवाड़ तक पहुंच गई। उन्होंने छात्रों को इकट्ठा किया और यूनिवर्सिटी पर धावा बोल दिया।
अब आंदोलन में नारेबाजी चल रही है- पहले लड़े थे गोरों से, अब लड़ेंगे चोरों से..

राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने पुनर्मूल्यांकन का मुद्दा उठाया। आरोप लगाया कि होनहार छात्रों को भी फेल किया जा रहा है ताकि वे पैसे देकर पुनर्मूल्यांकन कराएं।
4. चलते-चलते..
कानून की व्याख्या भुक्तभोगी भांति-भांति से करते हैं। कोई कहता है कि कानून अंधा होता है। किसी को लगता है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं।
यूं तो कानून कोई हाड़-मांस का ढांचा नहीं जिसकी आंखें, आंतें, हाथ या पैर हों।
कानून एक इच्छाशक्ति है। कानून की रखवाली करने के लिए पहनी वर्दी के पीछे अगर इच्छाशक्ति है तो कानून की आंखें टनाटन होंगी। हाथ लंबे और पैर मजबूत होंगे। उसे कोई रूमाल बनाकर जेब में नहीं रख पाएगा।
ऐसी ही इच्छाशक्ति श्रीगंगानगर की पुलिस ने दिखाई।
इनपुट मिला कि पाकिस्तान के रास्ते आए ड्रग्स और हथियार की डिलीवरी लेकर पंजाब के दो तस्कर भाग रहे हैं।
पुलिसवालों की इच्छाशक्ति फड़फड़ाई। कॉन्स्टेबल-SHO हमजा अली मजारी की तरह तैनात हो गए। सड़क पर दो ट्रैक्टर लगाकर रास्ता रोक दिया गया।
लग्जरी कार में तस्कर बुलेट की गति से निकले। ट्रैक्टर-ट्रॉली को टक्कर मारकर उड़ाने का प्लान था। लेकिन कार ने माथा ही फुड़ाया। तस्कर उतरकर खेतों की तरफ दौड़े।
पुलिसवालों ने भी दौड़ लगा दी। इस वक्त कानून के हाथ लंबे और पैर मजबूत नजर आ रहे थे। तस्कर हांफ गए। पुलिस वालों ने उन्हें ऐसे दबोचा जैसे चूहे पर गिद्ध झपटता है।

श्रीगंगानगर में कार के ट्रॉली से टकराने के बाद तस्कर खेतों में भागे, लेकिन पुलिस ने पीछा कर दबोच लिया।
