कैकेयी के दो वरदान, निषादराज मिलन और केवट संवाद का मार्मिक वर्णन, कथा पंडाल हुआ भक्तिमय

हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) । टाउन स्थित श्री सनातन महावीर दल धर्मशाला में आयोजित श्री राम कथा के सातवें दिवस श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के दौरान भगवान श्रीराम के वनवास, निषादराज से मिलन तथा केवट द्वारा गंगा पार कराने के अत्यंत मार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया गया। कथा सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। सुप्रसिद्ध कथावाचक गोपाल सुदामा शर्मा ने अपने मुखारविंद से रामचरितमानस के महत्वपूर्ण प्रसंगों का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि महारानी कैकेयी ने राजा दशरथ से पूर्व में प्राप्त दो वरदानों की मांग की। उन्होंने भरत को अयोध्या का राजसिंहासन तथा भगवान श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास देने का वर मांगा। राजा दशरथ इस मांग से अत्यंत व्यथित हो गए, किंतु रघुकुल की परंपरा के अनुसार वचन पालन सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने कैकेयी की मांग स्वीकार की। कथावाचक ने बताया कि भगवान श्रीराम ने पिता के वचनों की मर्यादा बनाए रखने के लिए बिना किसी विरोध के वनवास स्वीकार कर लिया। माता सीता और भ्राता लक्ष्मण भी उनके साथ वनगमन के लिए तैयार हो गए। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि माता-पिता की आज्ञा, सत्य और मर्यादा का पालन जीवन का सबसे बड़ा धर्म है। कथा के दौरान निषादराज गुह और भगवान श्रीराम के मिलन का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथावाचक ने कहा कि निषादराज की प्रभु के प्रति निष्काम भक्ति और समर्पण हमें यह शिक्षा देता है कि ईश्वर के लिए जाति, वर्ग और पद का कोई महत्व नहीं होता, बल्कि सच्ची भक्ति ही सबसे बड़ी पहचान होती है। इसके पश्चात केवट प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया। कथावाचक ने बताया कि जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण गंगा तट पर पहुंचे तो केवट ने प्रभु के चरण धोए बिना उन्हें नाव में बैठाने से इनकार कर दिया। केवट ने विनम्रता से कहा कि जिस प्रकार आपके चरणों के स्पर्श से पत्थर भी नारी रूप में परिवर्तित हो गया, कहीं मेरी नाव भी रूपांतरित न हो जाए। इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति, विनम्रता और समर्पण का अद्भुत संदेश दिया। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु पूरे समय भक्ति रस में डूबे रहे। जय श्रीराम के उद्घोष और भजनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। आयोजन समिति के अनुसार कथा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से सायं 6:30 बजे तक किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

