
नरसिंहपुरा बारानी में ठोस कचरा निस्तारण संयंत्र का विरोध तेज
श्रीगंगानगर (भटनेर एक्सप्रेस) श्रीकरणपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पदमपुर तहसील के नरसिंहपुरा बारानी गांव में गौशाला के निकट ठोस कचरा निस्तारण संयंत्र लगाए जाने के प्रस्ताव का ग्रामीणों द्वारा पिछले लगभग दो माह से सख्त विरोध किया जा रहा है। ग्रामीण रोजाना गौशाला के समीप धरना दे रहे हैं। अब उन्होंने राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए ग्राम सेवा शिविर अभियान का भी बहिष्कार कर दिया है। राज्य सरकार की ग्राम सेवाओं की शुरुआत के तहत आज नरसिंहपुरा और इससे सटी मांझूवास ग्राम पंचायत के सरकारी स्कूलों में ग्राम सेवा शिविर लगाए गए थे। लेकिन ग्रामीणों ने इन शिविरों का पुरजोर विरोध किया। परिणामस्वरूप दोनों पंचायतों के शिविरों में कोई कामकाज नहीं हो सका। शिविर में पहुंचे अधिकारी और कर्मचारी ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए वापस लौट गए। गौरक्षा दल नरसिंहपुरा के संयोजक मैसी चौधरी ने बताया कि ग्रामीणों के अडिग रुख के कारण दोनों ग्राम पंचायतों के शिविर पूरी तरह खाली हाथ रहे। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक नरसिंहपुर बरनी में प्रस्तावित ठोस कचरा निस्तारण संयंत्र का प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाता तब तक इन गांवों में कोई भी ग्राम सेवा शिविर नहीं लगने दिया जाएगा। ग्रामीणों की ओर से पदमपुर के तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा गया जिसमें स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई कि संयंत्र का प्रस्ताव वापस लिए बिना ग्राम सेवा शिविरों की अनुमति नहीं दी जाएगी।

ज्ञापन पर पदमपुर पंचायत समिति के डायरेक्टर मदनलाल, नरसिंहपुरा-मांझूवास की प्रशासक रानीदेवी, सतपाल मांझू,नरेंद्रकुमार, राजाराम, बेनीवाल, अमीचंद, सुशील, हरिसिंह, वासुदेव, शिवप्रकाश, रामेश्वर, अनंतराम, उग्रसेन, बृजलाल, अमरसिंह, राजकुमार तथा हेतराम गोदारा सहित अनेक ग्रामीणों ने हस्ताक्षर किए।मैसी चौधरी ने बताया कि गंग कैनाल के एलएनपी क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर भी सेवा शिविर नहीं लगने दिए जाएंगे। प्रशासन को इस संबंध में पहले ही आगाह कर दिया गया है। यह संयंत्र श्रीगंगानगर शहर के रोजाना उत्पन्न होने वाले ठोस कचरे के निस्तारण के लिए प्रस्तावित है जो जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर है। पहले यह संयंत्र श्रीगंगानगर शहर के निकट चक छह जैड़ में लगाया जाना था लेकिन स्थानीय रिहायशी कॉलोनियों और खेत मालिकों के कड़े विरोध के बाद वर्ष 2016 में इसे श्रीगंगानगर-सूरतगढ़ रोड नेशनल हाईवे 62 पर लगभग 8 किमी दूर गांव नेतेवाला में शिफ्ट करने का प्रस्ताव बनाया गया। सभी विभागों से अनुमतियां प्राप्त हो चुकी हैं और लगभग 78 करोड़ रुपये का टेंडर भी जारी हो चुका है। लेकिन दो महीने पहले जिला प्रशासन ने अचानक इसे और आगे श्रीकरणपुर विधानसभा क्षेत्र के नरसिंहपुरा बारानी गांव में गौशाला के पास स्थानांतरित करने का फैसला लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस शिफ्टिंग में जिला प्रशासन के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। नरसिंहपुरा बारानी के लोग पिछले दो महीनों से लगातार धरना दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले 20 वर्षों से श्रीगंगानगर शहर के कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की कोई ठोस योजना जिला प्रशासन तैयार नहीं कर पाया है। बार-बार स्थल बदलने की बजाय स्थायी और पर्यावरण अनुकूल समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा, यह सवाल उठ रहा है। ग्रामीण संयंत्र से पर्यावरण प्रदूषण, गौशाला पर प्रभाव, भूमि की उर्वरता, स्वास्थ्य जोखिम और आसपास विकसित हो रही कॉलोनियों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को लेकर बेहद चिंतित हैं। उन्होंने संयंत्र प्रस्ताव पूरी तरह रद्द किए बिना किसी भी सरकारी कार्यक्रम को अपने क्षेत्र में नहीं लगने देने का संकल्प लिया है।
