
जिला कलेक्ट्रेट पर धरना, ज्ञापन सौंपा, दमनात्मक कार्यवाहियों के खिलाफ चेतावनी
श्रीगंगानगर (भटनेर एक्सप्रेस) राजस्थान पंचायती राज सेवा परिषद ने आज जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर स्वच्छता अभियान में हो रही पक्षपातपूर्ण, वर्गभेदी और दमनात्मक कार्यवाहियों का कड़ा विरोध जताया। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला अध्यक्ष विनोद सुथार ने किया। उनके साथ प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज वर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष रामकुमार भांभू, ब्लॉक महामंत्री जितेंद्र मीणा, सचिन सारस्वत, ओमप्रकाश शर्मा, पंकज मुंजाल, भवानी शंकर शर्मा सहित पंचायती राज विभाग के बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए।प्रदर्शन के बाद परिषद के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्वच्छता कार्यों के निरीक्षण रिपोर्ट में अभियंता संवर्ग को क्लीन चिट देकर अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया है। ज्ञापन का मुख्य विषय स्वच्छता अभियान में पक्षपातपूर्ण, वर्गभेदी एवं दमनात्मक कार्यवाहियों के विरुद्ध कड़ा विरोध एवं चेतावनी रहा। इसमें श्रीगंगानगर जिले की ग्राम पंचायतों के निरीक्षण प्रतिवेदन 23 अप्रैल और निरीक्षण रिपोर्ट 22 मई का संदर्भ दिया गया। ज्ञापन में कहा गया कि पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर द्वारा 23 अप्रैल को जिले की विभिन्न ग्राम पंचायत समितियों में स्वच्छता कार्यों का निरीक्षण किया गया था, लेकिन इसके दो माह बाद विश्वसनीय सूत्रों से पता चला कि उक्त ग्राम पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारियों, प्रशासकों, अतिरिक्त विकास अधिकारियों, ब्लॉक समन्वयकों, जिला समन्वयकों, विकास अधिकारियों, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारियों एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारियों तक के विरुद्ध सुनियोजित दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है, जो सर्वथा अनुचित और पक्षपातपूर्ण है तथा मंत्री की भावना के विपरीत है। संगठन ने आरोप लगाया कि ग्रामीण राजस्थान को स्वच्छ रखने के लिए राज्य सरकार और विभाग लगातार दिशा-निर्देश जारी कर रहा है, फिर भी कुछ वरिष्ठ अधिकारी विभागीय बैठकों और धरातल पर खुलेआम वर्गभेद करते हुए स्वच्छता कार्यों में जानबूझकर बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं। बूंदी जिले में 9 मई के निरीक्षण के आधार पर 22 मई को प्रस्तुत रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा गया कि इसमें संवर्ग विशेष के दो अधिकारियों ने सरपंच से लेकर मुख्य कार्यकारी अधिकारी तक के विरुद्ध कार्यवाही की सिफारिश की, जबकि तकनीकी अभियंता संवर्ग का नामोल्लेख तक नहीं किया गया, जो मैपिंग, तकमीना, टेंडर, मूल्यांकन और भुगतान में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसे सुनियोजित वर्ग-संघर्ष उत्पन्न करने का षड्यंत्र बताया गया। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि केन्द्रीय वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत ग्राम पंचायतों को जनवरी 2026 तक कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है, जिस कारण स्वच्छता स्वीकृतियां और टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। जब विभाग स्वयं संसाधन उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, तब मैदानी कर्मचारियों- अधिकारियों पर एकतरफा दमनात्मक कार्रवाई करना माननीय मंत्री महोदय की आंखों में धूल झोंकने के समान है।
संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उपरोक्त दमनात्मक, पक्षपातपूर्ण और वर्गभेदी कार्यवाहियां तत्काल बंद नहीं की गईं तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही नहीं की गई तो श्रीगंगानगर जिले में समस्त ग्रामीण सेवा शिविरों का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा और राज्य स्तरीय आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। परिषद ने मांग की है कि 22 मई की भेदभावपूर्ण निरीक्षण रिपोर्ट को तत्काल निरस्त किया जाए, रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जांच और दंडात्मक कार्यवाही की जाए, निलंबन या 16 सीसीए के तहत प्रस्तावित कार्यवाहियां वापस ली जाएं, केन्द्रीय और राज्य वित्त आयोग की लंबित राशि शीघ्र जारी की जाए तथा भविष्य में निरीक्षण दलों में संतुलित और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। एकल संवर्ग के अधिकारियों को जाँचकर्ता नियुक्त करने की मनमानी परंपरा तुरंत बंद की जाए। परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारी वित्तीय और मानवीय संसाधनों की कमी, सफाई संवेदकों की अनुपलब्धता तथा तकनीकी जटिलताओं के बावजूद पूर्ण निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। उनके मनोबल को तोड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
