

श्रीगंगानगर। बालिका दुष्कर्म प्रकरण मेँ पुलिस प्रशासन ने तीन होटलों का एनकाउंटर कर “अपराधियों मेँ भय, आम जन मेँ विश्वास” टैगलाइन को सार्थक करने की बड़ी कोशिश की है। होटलों का एनकाउंटर होने पास यकीनन आस पास के निर्दोष व्यक्तियों का भी नुकसान हुआ, किन्तु सब कुछ देख कर भी खामोश रहने की कीमत तो चुकनी ही पड़ती है। इसे यूं भी कह सकते हैं कि कनक के साथ घुन भी पिस जाता है। बीरबल चौक, हाउसिंग बोर्ड चौक और यूआईटी की ओर जाने वाले सड़क से पहले स्थित तीन होटलों को आज तड़के पुलिस प्रशासन ने तोड़ दिया। क्योंकि इन्हीं होटलों मेँ उस बालिका के साथ वो हुआ, जिसे किसी भी सूरत मेँ उचित नहीं कहा जा सकता। सुबह से बड़ी संख्या मेँ नागरिक इन्हें देखने के लिये आ रहे हैं। कोई आते जाते रुक कर पूछता है कि क्या हुआ? किसी ने कहा, यो ठीक कर दियो! किसी का मन इतने से नहीं भरा हुआ था, वो बोला, पूरा ही तोड़ना था, छोड़ क्यों दिया। तोड़े गए होटलों का मलबा मौके पर है। तोड़े गए होटलों के अंदर क्या कुछ है वो दिखाई दे रहा है। नागरिक फोटो ले रहे हैं। अनेक ने वीडियो भी बनाए। बीरबल चौक पर होटल के नीचे एक दुकानदार का छप्पर भी टूटा। हालांकि प्रशासन ने कल शाम ही उसे सचेत कर दिया था। इसके बावजूद उसका नुकसान तो हुआ ही है। लेकिन ये पहली और अंतिम कार्रवाई नहीं है। अभी कुछ दिनों मेँ इसी प्रकार की और कार्रवाई देखने को मिल सकती है। नेताओं ने ऐसे कामों मेँ संलिप्त व्यक्तियों की सिफ़ारिश के लिये फोन नहीं किए तो पुलिस अब पीछे हटने वाली नहीं है।


