

ध्रुव चरित्र की प्रेरणादायी कथा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, पूर्व सभापति राजकुमार हिसारिया व अमित चौधरी ने सपत्नीक की पूजा-अर्चना
हनुमानगढ़(भटनेर एक्सप्रेस) जंक्शन स्थित जाट भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चिंतन का अद्भुत संगम देखने को मिला। परम पूज्य आचार्य श्री देवीदान जी गौश्री ने अपने प्रवचनों में श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, धर्म, भक्ति और मोक्ष का मार्ग दिखाने वाला दिव्य ज्ञान है। कथा प्रारंभ होने से पूर्व पूर्व सभापति राजकुमार हिसारिया एवं भाजपा नेता अमित चौधरी ने अपनी धर्मपत्नी के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया।
आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अपना क्रोध और मोह है। यही दोनों विकार व्यक्ति को कालचक्र में बांधे रखते हैं और उसे जन्म-मृत्यु के अनंत चक्र से मुक्त नहीं होने देते। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह का त्याग नहीं करता, तब तक वह वास्तविक सुख और शांति प्राप्त नहीं कर सकता। भगवान की भक्ति और सत्संग ही इन बंधनों से मुक्ति का सबसे सरल और प्रभावी मार्ग है।
अपने प्रवचन में आचार्य श्री ने ध्रुव चरित्र की प्रेरणादायी कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि बालक ध्रुव ने मात्र पांच वर्ष की आयु में अपमान और उपेक्षा को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसे ईश्वर प्राप्ति का संकल्प बना लिया। नारद मुनि के मार्गदर्शन में कठोर तपस्या कर उन्होंने भगवान विष्णु को प्रसन्न किया और अटल ध्रुवपद प्राप्त किया। आचार्य श्री ने कहा कि ध्रुव की कथा हमें सिखाती है कि दृढ़ निश्चय, अटूट विश्वास, भक्ति और धैर्य से असंभव लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, यदि मनुष्य का विश्वास भगवान पर अटल हो तो सफलता अवश्य मिलती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में धर्म, सत्य, सेवा और सदाचार को अपनाएं तथा क्रोध और मोह जैसे विकारों से दूर रहकर समाज में प्रेम, करुणा और सद्भाव का संदेश फैलाएं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत का नियमित श्रवण मनुष्य के मन को निर्मल बनाता है और उसे आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है।
कथा के दौरान भजन-कीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से पूरा पांडाल भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ उठाया। आयोजन समिति ने बताया कि कथा आगामी 5 जुलाई तक प्रतिदिन आयोजित होगी तथा समापन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-यज्ञ एवं पूर्णाहुति संपन्न होगी। समिति ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से परिवार सहित कथा में उपस्थित होकर भगवान की अमृतमयी कथाओं का श्रवण करने का आह्वान किया।
