
हनुमानगढ़ जिले में गांव हरिपुरा के खेतों में भरा बरसाती पानी। भास्कर संवाददाता | हनुमानगढ़ जिले के हनुमानगढ़ और टिब्बी तहसील क्षेत्र में सितंबर और अक्टूबर माह में हुई भारी बारिश से पानी भर गया। घग्घर नदी में भी पानी की आवक होने के कारण भूमिगत जलस्तर बढ़ गया और बारिश का पानी सूखा नहीं। जिले के गांव मुंडा, रणजीतपुरा, हरिपुरा, मेहरवाला, आदर्शनगर, डबलीकलां, मसीतांवाली की रोही में लगभग 4 हजार हेक्टेयर में अब भी 2 से 3 फीट पानी जमा है। लगातार पानी जमा होने से खरीफ सीजन में कपास और धान की फसलें शत-प्रतिशत नष्ट हो गई। अब तक रबी सीजन की सरसों की बिजाई का समय भी निकल चुका है। आगामी 10-15 दिन में पानी की निकासी नहीं हुई तो गेहूं और जौ की बिजाई भी नहीं होगी। इससे किसानों को भारी नुकसान होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि पानी निकासी के लिए जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई एक्शन प्लान तक तैयार नहीं किया गया है। विशेष गिरदावरी का काम भी नहीं हुआ है। ऐसे में प्रभावित किसानों को कोई राहत मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही। इस कारण किसानों में प्रशासन और सरकार के प्रति आक्रोश भी बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि एक फसल खराब होने का दंश झेल रहे थे और प्रशासन की नाकामी से दूसरी फसल की बिजाई ही नहीं होगी। आगामी दिन किस उम्मीद में गुजरेंगे यही सोचकर दिल बैठ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बरसाती नदी घग्घर में इस बार लगातार 4 माह से पानी बह रहा है। घग्घर का पानी जीडीसी यानी सेमनाला में चलाया जा रहा है। अगस्त में करीब 14 हजार क्यूसेक पानी चलाया गया। वर्तमान में करीब 150-200 क्यूसेक पानी चल रहा है। जीडीसी की लाइनिंग और बैड पक्का नहीं है। लगातार पानी प्रवाहित होने के कारण आस-पास के खेतों में भूमिगत जलस्तर बढ़ गया है। इस बार मानसून अवधि में जिले में बारिश भी ज्यादा हुई। 1 जून से 10 अक्टूबर तक हनुमानगढ़ तहसील में 709 एमएम और टिब्बी तहसील में 685 एमएम बारिश हुई। लगातार बारिश की वजह से खेतों में पानी भर गया। भूमिगत लेवल भी बढ़ गया। इसी कारण अब तक खेतों में पानी भरा हुआ है। इस पानी की निकासी के लिए पंप सेट लगाकर ही किसानों को राहत दी जा सकती है। किसान पानी लिफ्ट कर जीडीसी में डालने के लिए काफी समय से संघर्ष कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि अतिवृष्टि का जायजा लेने के लिए सरकार की ओर से जिला प्रभारी मंत्री को भी जिले के दौरे पर भेजा गया। यह दौरा भी सिर्फ कागजी साबित हुई। अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को परिवार के पालन-पोषण का उत्पन्न हुआ संकट, पशुओं के लिए चारा भी नहीं: अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों के सामने परिवार का पालन-पोषण करने का भी संकट उत्पन्न हो गया है। किसानों के अनुसार फसल की उम्मीद में ही दुकानदार राशन या अन्य जरूरत का सामान उधार देते थे। अब खेतों में पानी भरने से फसलें नष्ट हो गई। अब परिवार का गुजारा करना भी मुश्किल हो गया है। सेम से प्रभावित किसान सतपाल, गौरीशंकर, महेंद्र ने बताया कि खेतों में पानी भरने से हरे चारे की भी व्यवस्था नहीं है। खेतों में रखी तूड़ी भी भीग कर सड़ चुकी है। हरे चारे की बिजाई नहीं हो रही। इस कारण पशुओं के लिए चारे का संकट भी उत्पन्न हो गया है।
किसानों के अनुसार उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया। जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगाई। दो माह बाद भी अब तक कोई राहत नहीं मिली है। अगली फसल की बिजाई नहीं हुई तो फिर परेशानी और ज्यादा बढ़ जाएगी। पानी निकासी के लिए प्रस्ताव तैयार करवा रहे, एक मुश्त मुआवजे के प्रयास: अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन सक्रियता से काम कर रहा है। पानी निकासी के लिए जल संसाधन विभाग व राजस्व विभाग से प्रस्ताव तैयार करवाया जा रहा है। फिर सरकार को भिजवाया जाएगा। प्रभावित किसानों को एक मुश्त मुआवजा दिलाने के प्रयास जारी है। डॉ. खुशाल यादव, कलेक्टर
