
श्रीगंगानगर कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो मुश्किलें भी रास्ता छोड़ देती हैं। श्रीगंगानगर जिले के छोटे से गांव मम्मड़ खेड़ा के अंशुमन सहारण ने यही कर दिखाया। पहली बार नेशनल वुशु चैंपियनशिप खेलने उतरे अंशुमन ने सेमीफाइनल में चोट लगने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। दर्द को दरकिनार कर फाइनल में पंजाब के खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया। 28 अक्टूबर से 1 नवंबर तक श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) में हुई 69वीं अंडर-17 स्कूल नेशनल वुशु चैंपियनशिप में राजस्थान ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल जीते और ओवरऑल रनरअप बना। अंशुमन का गोल्ड इसमें सबसे खास रहा, क्योंकि यह उनका पहला नेशनल टूर्नामेंट था। इन खिलाड़ियों के जीते पदक : हिमानी वैष्णव, अलमास खान, रिया मिश्रा, अंशुमन सहारण ने गोल्ड, गायत्री पूनिया, नोजल ने सिल्वर व दिव्यांश, मनीष कांस्य पदक प्राप्त किया।
^मेरे पिता राजपाल सहारण किसान और माता शारदा देवी गृहिणी है। मेरे चाचाजी का लड़का मयंक अच्छा खिलाड़ी है। मुझे से छोटा है, लेकिन मेरी प्रेरणा वह ही बना। 2 साल से तैयारी कर रहा हूं। पिछली बार स्टेट में सिल्वर मिला था, तब ठान लिया था कि अगली बार गोल्ड जीतकर नेशनल प्रतियोगिता के लिए चयनित होना है। मैंने सरस्वती स्पोर्ट्स एकेडमी मम्मड़ खेड़ा में अभ्यास शुरू किया। मेरे कोच जोनप्रीत सिंह बने। मैं रोजाना सुबह-शाम दो-दो घंटे अभ्यास कर रहा हूं और अब तक एक भी दिन छुट्टी नहीं ली। इस बार यह मेरा पहला नेशनल टूर्नामेंट था। सेमीफाइनल में जम्मू के खिलाड़ी के साथ फाइट में हल्की चोट लगी, लेकिन मैंने दर्द को दरकिनार कर पूरी फाइट लड़ी… और जीत अपने नाम की। क्योंकि मेरा लक्ष्य गोल्ड था। मेरा फाइनल मुकाबला पंजाब के खिलाड़ी के साथ था। उसे दौरान भी हल्का-हल्का दर्द हो रहा था। मुझे तो गोल्ड जीतना था। वह दर्द भुलाकर मैंने फाइनल फाइट खेलकर गोल्ड जीता लिया। यह मेरी जीत नहीं सबकी जीत है। जैसा कि अंशुमन सहारण ने बताया
