
हनुमानगढ़ मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, जिसका उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाना है, वह अब युवाओं की परेशानी का बड़ा कारण बन चुकी है। जिले में इस योजना के तहत 300 से अधिक आवेदकों की लगभग 3 करोड़ रुपए की सब्सिडी पिछले एक साल 9 माह से अटकी हुई है। कई आवेदकों की फाइलें 2024 से लंबित हैं, जिन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। सब्सिडी प्राप्त किए बिना उद्यमियों को पूरे ऋण की मासिक किस्त भरनी पड़ रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
कई युवा अपने व्यवसाय को बढ़ाने की बजाय बैंक के नोटिसों से परेशान घूम रहे हैं। योजना के तहत बैंक ऋण स्वीकृत तो कर दे रहे हैं, लेकिन सब्सिडी की राशि राज्य स्तर पर अटकी हुई है। सब्सिडी न मिलने से कई युवाओं के कारोबार की शुरुआत अधर में लटक गई है। कुछ लोगों ने मशीनें तो लगा ली हैं लेकिन कैश फ्लो नहीं बनने से कारोबार सुचारू नहीं चल पा रहा। युवाओं का कहना है कि योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी से शुरुआत में बड़ा आर्थिक सहारा मिलता है, लेकिन सब्सिडी की देरी ने उनका सपना ही रोक दिया है। मुकेश मित्तल , पूर्व सचिव हनुमानगढ़ उद्योग समिति सरकारी योजनाएं अब कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं। सरकार सिर्फ अपनी वाहवाही लूटने के लिए ऐसी योजना तो शुरू कर देती है। मगर उद्यमियों को ऑपिस में घुसने तक नहीं दिया जाता। इसके साथ ही बिना भ्रष्टाचार के कोई काम भी नहीं होता है। सरकार की जितनी भी योजना है, उसका लाभ आम आदमी को तो बिल्कुल भी नहीं मिलता। रही बात सब्सिडी की तो हनुमानगढ़ जिले में इके दूके आदमी को छोड़कर किसी को नहीं मिली। इसके लिए राज्य स्तर पर स्वीकृति प्रक्रिया को टाइम-बाउंड किया जाए। सब्सिडी वितरण की स्थिति ऑनलाइन पोर्टल पर सार्वजनिक हो।
जिला उद्योग केंद्र में शिकायत निवारण डेस्क बने। बजट आवंटन समय पर सुनिश्चित किया जाए। बैंकों को निर्देश दिए जाएं कि सब्सिडी लंबित होने पर उद्यमियों पर अतिरिक्त दबाव न डालें। जिला उद्योग केंद्र में कई चक्कर काटे, हर बार जवाब मिला-फाइल जयपुर में है सब्सिडी को लेकर जिला उद्योग केंद्र में कई बार चक्कर लगा चुके है। हर बार यही बताया जाता है कि फाइल जयपुर भेज दी है, वहां से पास होते ही सब्सिडी मिल जाएगी। लेकिन एक साल 9 माह से यह जवाब बदलता नहीं है। जिला उद्योग केंद्र से लेकर बैंक और उद्योग विभाग तक सभी जगह चक्कर काट चुके हैं, पर समाधान नहीं मिला। – पुष्पेंद्र शर्मा, कपड़ा व्यवसायी, हनुमानगढ़। सब्सिडी न मिलने से बिजनेस के शुरुआती खर्च पूरे नहीं हो पा रहे। बैंक किस्तें भारी पड़ रही हैं। वहीं कच्चा माल खरीदने में दिक्कतें आ रही है। नए रोजगार पैदा करने की योजना टल गई है। ऐसे में कई युवा मानसिक दबाव में है। योजना का मूल उद्देश्य युवाओं को खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना था, लेकिन सब्सिडी अटकने से इसका असर उल्टा हो रहा है।
योजना के लिए फंड की मांग भेज दी है बजट आवंटन की कमी और उच्च स्तर पर मंजूरी में देरी के कारण सब्सिडी पेंडिंग है। योजना के लिए फंड की मांग भेज दी गई है, लेकिन रिलीज होने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई जा रही। इस कारण न केवल हनुमानगढ़ बल्कि प्रदेशभर के उद्यमी प्रभावित हो रहे हैं। आकाशदीप सिद्धू, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र, हनुमानगढ़।
