
श्रीगंगानगर से जयपुर, दिल्ली के बीच जल्द ही हवाई सेवा शुरू होगी। लालगढ़ जाटान में स्थित हवाई पट्टी का विस्तार होने के बाद विमान यहां से उड़ान भर सकेंगे। नागरिक उड्डयन विभाग की कंसल्टेंट टीम ने चार चरणों में सर्वे पूरा कर लिया है। इसी माह फाइनल रिपोर्ट विभाग को सौंपी जाएगी।
श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर यह हवाई पट्टी वर्तमान में 1300 मीटर लंबी और 30 मीटर चौड़ी है, जो छोटे विमानों के लिए ही उपयुक्त है। विस्तार के बाद इसे 1600 मीटर से ज्यादा किया जाएगा। साथ ही बफर जोन भी जोड़ा जाएगा। इससे 50 सीटर विमान भी आसानी से यहां लैंडिंग-टेकऑफ कर सकेंगे।

श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय से लालगढ़ जाटान हवाई पट्टी की दूरी 18 किलोमीटर है।
एक्सपर्ट के मुताबिक रनवे को 1600 मीटर तक बढ़ाने के लिए 300 मीटर तक बफर जोन जरूरी है। सर्वे में पश्चिम दिशा में कृषि भूमि उपलब्ध होने की संभावना जताई गई है। पूर्व में स्टेट हाईवे 7बी होने से वहां विस्तार मुश्किल है। यदि रिपोर्ट के मुताबिक काम हुआ, तो बड़े विमानों के संचालन की राह खुलेगी।
कंसल्टेंसी टीम ने 26 सितंबर और 17 अक्टूबर को सर्वे में पश्चिम दिशा को प्राथमिकता दी थी। पूर्व दिशा में 300-500 मीटर भूमि अधिग्रहण संभव नहीं, जबकि पश्चिम में कृषि भूमि लेकर विस्तार आसान हो सकता है।
हवाई पट्टी के दोनों किनारों पर अभी 7.5-7.5 मीटर जगह लाइटिंग आदि के लिए इस्तेमाल हो रही है। विस्तार में बफर जोन को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि लैंडिंग-टेकऑफ में कोई जोखिम न रहे।

7 अगस्त 2018 को सुप्रीम एयरलाइंस कंपनी का प्राइवेट प्लेन हवाई पट्टी की दीवार से टकरा गया था।
पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों का कहना है- हवाई पट्टी विस्तार में पीडब्ल्यूडी की सीधी भूमिका नहीं है। निर्णय एविएशन विभाग का है। सर्वे पूरा हो चुका है और रिपोर्ट आने के बाद सरकार जो कहेगी, वह काम करवा दिया जाएगा।
क्यों जरूरी है बफर जोन
रनवे एंड सेफ्टी एरिया (RESA) या बफर जोन रनवे के सिरों से सटा होता है। इसका मकसद विमान के रनवे से बाहर निकलने या ओवरशूट होने पर नुकसान कम करना है। यह 100 से 300 मीटर तक हो सकता है। दुर्घटना में यात्रियों और क्रू की सुरक्षा बढ़ाता है।
पायलट पहले ही दे चुके चेतावनी
12 सितंबर 2013 को सीएम का प्लेन उतारने वाले चीफ पायलट केसरीसिंह ने 1300 मीटर पट्टी को वीवीआईपी विमानों के लिए अनसेफ बताया था। उन्होंने साफ कहा था कि छोटे विमानों के लिए भी 1800 मीटर रनवे और 250 मीटर सेफ जोन जरूरी है।
दीवार से टकराया था विमान
लालगढ़ जाटान हवाई पट्टी पर 7 अगस्त 2018 को जयपुर से श्रीगंगानगर आ रहा सुप्रीम एयरलाइंस का 9 सीटर विमान लैंडिंग के दौरान रनवे पर नहीं रुक सका। विमान ने बाउंड्री वॉल तोड़ दी और आधा हिस्सा बाहर निकल गया और एक पेड़ में अटक गया। विमान में 7 यात्रियों सहित 2 क्रू मेंबर सवार थे जो सुरक्षित बच गए। किसी को चोट नहीं लगी और सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
घटना के बाद पायलटों ने बताया कि रनवे पर पक्षियों का झुंड होने से लैंडिंग प्रभावित हुई और विमान ओवरशूट हो गया। लेकिन मुख्य वजह हवाई पट्टी की छोटी लंबाई बताई जाती है, जिससे बड़े या तेज गति वाले विमानों के लिए रुकना मुश्किल हो जाता है।

सुप्रीम एयरलाइंस का यही विमान हवाई पट्टी की दीवार से टकराया था। इसके बाद दो पायलट को सस्पेंड कर दिया गया था।
2 पायलट हुए थे सस्पेंड
हादसे के बाद DGCA (डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने जांच शुरू की। पायलट प्रियंक राव का लाइसेंस निलंबित और बाद में निरस्त कर दिया गया। को-पायलट शिवानी को भी सस्पेंड किया गया हादसे के बाद क्षतिग्रहस्त विमान करीब दो महीने तक हवाई पट्टी पर ही खड़ा रहा।
इसे देखने के लिए दूर-दूर से सैकड़ों लोग रोज आते थे। यह घटना देश भर में चर्चित रही। बाद में विमान को रिपेयर के लिए ट्रेलर पर लादकर जयपुर ले जाया गया। इस घटना के बाद से हवाई सेवा शुरू नहीं हो सकी। हालांकि, सेना के हेलीकॉप्टर यहां उतरते रहते हैं।
