
श्रीगंगानगर मकान-दुकान किराए पर देने वाले मालिकों और किराएदारों के लिए यह खबर खास है। राज्य सरकार ने रजिस्ट्री कानून में बड़ा संशोधन करते हुए अब हर तरह के किराया एग्रीमेंट की रजिस्ट्री अनिवार्य कर दी है। चाहे आप मकान, फ्लैट, दुकान या जमीन महज एक महीने के लिए ही क्यों न दे रहे हों, अब आपको रजिस्ट्री करानी ही होगी। इसे एक नियम नहीं, बल्कि राजस्थान के रियल एस्टेट सेक्टर में आने वाला बड़ा बदलाव भी माना जा रहा है। जो आम आदमी की जेब पर सीधा बोझ डालेगा।
पहले मकान मालिक और किराएदार मिलकर रजिस्ट्री फीस बचाने के लिए 11 महीने का किरायानामा बना लेते थे, लेकिन अब यह दस्तावेज बेमानी हो गया है। कानूनी विवाद होने पर बिना रजिस्ट्री वाला किरायानामा कोर्ट में कोई दस्तावेज नहीं माना जाएगा। कोई संपत्ति किराए पर देने वाले को स्टाम्प ड्यूटी के रूप में संपत्ति के बाजार मूल्य का 0.02 फीसदी चुकाना होगा। इसके ऊपर रजिस्ट्रेशन फीस के तौर पर इस स्टाम्प ड्यूटी की कुल राशि का 20 फीसदी और देना होगा। इस फैसले से सरकार का राजस्व बढ़ना तय हो गया है। एसआर श्यामसुंदर के अनुसार सरकार ने रजिस्ट्रेशन (राजस्थान अमेंडमेंट) एक्ट, 2021 के तहत कई बड़े बदलाव किए हैं, जो 2 दिसंबर से लागू हो चुके हैं। एक्सपर्ट: सुरेंद्र पारीक, रिटायर्ड तहसीलदार । अब एक महीने, तीन महीने या सालभर, किसी भी अवधि के किरायानामे के लिए रजिस्ट्री जरूरी है। ग्यारह माह वाली जुगाड़ व्यवस्था समाप्त की।
संपत्ति बेचने का कोई भी समझौता, चाहे उस पर कब्जा दिया गया हो या नहीं, अब रजिस्ट्रेशन के बिना अमान्य होगा। बैंक अब गिरवी रखी संपत्ति के दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी तुरंत रजिस्ट्रार को भेजेंगे। फेक मॉर्गेज और डुप्लीकेट डीड का मामला खत्म। बिना सक्षम अधिकारी की मंजूरी के नगरपालिका, विकास प्राधिकरण या किसी भी सरकारी विभाग की जमीन खरीदने-बेचने पर पूरी तरह से रोक। एससी/एसटी की कृषि भूमि की रजिस्ट्री के लिए या तो खरीदार भी एससी/एसटी या फिर सक्षम अधिकारी से मंजूरी लेना जरूरी। किसी भी प्राइवेट कॉलोनी एरिया में संपत्ति खरीद बेच से पहले संबंधित विभाग से मंजूरी जरूरी।
