
श्रीगंगानगर पुरानी आबादी वार्ड नंबर 16 में स्थित बाबा बालक नाथ डेरे में रविवार को 9 सिद्ध समाधियों को नया स्वरूप देकर विधिवत स्थापित किया गया। यह आयोजन भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ, जिसमें नाथ संप्रदाय के साधु और महंतों की विशेष उपस्थिति रही। टीले के महंत बाबा दिवाली नाथ ने बताया कि डेरे में स्थित ये 9 समाधियां प्राचीन हैं। अब इन्हें विशेष प्रारूप देकर स्थायी रूप से स्थापित किया गया है। समाधियों को खास जोधपुरी पत्थर से तैयार कराया गया है, जिससे इनकी शोभा और धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर दीप जलाकर और भजन-कीर्तन सुनकर भक्ति की अनुभूति प्राप्त की। इन नाथों की है समाधियां : महंत बाबा बालक नाथ, महंत सुंदरनाथ, महंत ध्याननाथ, महंत सोमनाथ, महंत सरस्वती नाथ, महंत शंकरनाथ, महंत मंगलनाथ और महंत भूतनाथ। महंत बाबा दिवाली नाथ ने बताया कि नाथों की समाधियों की पूजा सतनाथ संप्रदाय के साधु द्वारा ही करवाई जाती है। यह परंपरा आदि-काल से चली आ रही है। पूजा विकास नाथ साधु ने संपन्न करवाई, जो सतनाथ संप्रदाय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि 9 समाधियों की पूजा के लिए विशेष रूप से 9 नाथों का पूजन किया गया।
उन्होंने कहा कि नाथ संप्रदाय में ‘सतनाथ का साधु’ केवल संन्यासी नहीं होता, बल्कि वह व्यक्ति होता है जो सतनाथ परंपरा में दीक्षित होकर उसके नियमों और मर्यादाओं का पालन करता है। यही कारण है कि वह समाज में धार्मिक और सामाजिक मार्गदर्शक के रूप में सम्मानित होता है। 2023 में संभाली थी गद्दी: उल्लेखनीय है कि इस टीले की गद्दी बाबा दिवाली नाथ ने वर्ष 2023 में संभाली थी। तब से डेरे में परंपराओं और धार्मिक गतिविधियों को नए भक्तिमय स्वरूप में संवारा और विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सतनाथ साधु और समाधियों की पूजा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि नाथ समाज में सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक अनुशासन और भक्तिभावना को भी मजबूत करती है।
कार्यक्रम में नाथ समाज के कई प्रमुख महंत भी उपस्थित रहे। इनमें नाथांवाली डेरे के महंत धर्मनाथ, मन्नीवाली डेरे के घनश्याम नाथ, तीर्थीनाथ, जगदीशनाथ, मनसुख नाथ, राजेश नाथ, लाधूवाली डेरे के महंत रामनाथ, राजेश नाथ, मुकलावा डेरे से सागर नाथ शामिल थे। भक्तों ने दीप जलाकर और भजन-कीर्तन सुनकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। महंत दिवाली नाथ ने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि नाथ समाज में सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है।
