
श्रीगंगानगर जिले में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़ साहिब में सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के चार साहिबजादों का शहीदी दिहाड़ा बड़े ही श्रद्धा के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर गुरुद्वारे में बड़ी संख्या में संगत पहुंची और छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह जी की शहादत को नमन किया।

गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़ साहिब में मौजूद संगत।
लंगर-प्रसादी ली
शहीदी दिहाड़े पर गुरुद्वारा साहिब में गुरु का अटूट लंगर लगाया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने लंगर छका। साथ ही अखंड पाठ साहिब का भोग डाला गया, जिसके बाद विशेष दीवान सजाया गया। संगत ने कीर्तन और अरदास में भाग लिया। हेड ग्रंथी भाई भूपेंद्र सिंह ने संगत को संबोधित करते हुए चार साहिबजादों के जीवन और बलिदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
साहिबजादों की कहानी बताई
भूपेंद्र सिंह ने बताया कि कैसे गुरु गोबिंद सिंह जी के बड़े साहिबजादे बाबा अजीत सिंह और बाबा जुझार सिंह ने चमकौर की लड़ाई में वीरगति प्राप्त की, जबकि छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह को मुगल शासक वजीर खान ने सरहिंद में जिंदा दीवार में चिनवा दिया था। भाई साहब ने कहा कि इस दिन का महत्व इसलिए है क्योंकि यह साहिबजादों की अटूट आस्था, साहस और धर्म रक्षा की मिसाल है।
उन्होंने संगत से अपील की कि युवा पीढ़ी को इन बलिदानों की गाथा सुनाकर धर्म और देश के प्रति निष्ठा जगाई जाए।
गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़ साहिब का ऐतिहासिक महत्व भी जगजाहिर है। यह स्थान भाई सुखा सिंह और मेहताब सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने अमृतसर के हरमंदिर साहिब की बेअदबी करने वाले मस्सा रंगड़ का सिर काटकर यहां लटकाया था। रायसिंहनगर तहसील के डाबला गांव के पास स्थित इस गुरुद्वारे में हर साल शहीदी सप्ताह और अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं। इस बार भी संगत ने शहादत की याद में अरदास की।
