
श्रीगंगानगर। बीकानेर कैनाल में पंजाब से पानी के उतार-चढ़ाव का क्रम रविवार को भी जारी रहा। फिरोजपुर फीडर में 21 जनवरी से नहरबंदी शुरू होने के बाद अधिकारियों के आश्वासन के अनुसार राजस्थान के किसानों को पूरा पानी नहीं मिल रहा है। इस कारण किसानों में आक्रोश है। राजस्थान बॉर्डर के खखां हेड पर 1500 क्यूसेक पानी देने की मांग को लेकर महाराजा गंगासिंह चौक पर धरना दे रहे हैं। फिरोजपुर फीडर में नहरबंदी शुरू होने के साथ ही पुरानी बीकानेर व पुरानी ईस्टर्न कैनाल के माध्यम से हुसैनीवाला से पानी लिया जा रहा है। रविवार को आरडी 45 से बीकानेर कैनाल में 1600 क्यूसेक पानी प्रवाहित किया जा रहा था तथा राजस्थान बॉर्डर के खखां हेड पर सिर्फ 1300 क्यूसेक पानी ही पहुंच रहा था।
संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों ने बताया कि फिरोजपुर फीडर में नहरबंदी शुरू होने से पहले प्रशासनिक व विभाग के अधिकारियों के साथ किसान प्रतिनिधियों की बैठक हुई थी। इसमें अधिकारियों ने नहरबंदी के दौरान बीकानेर कैनाल में खखां हेड पर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत 1500 क्यूसेक पानी देने का आश्वासन दिया था। लेकिन 21 जनवरी से अब तक खखां हेड पर एक दिन भी 1500 क्यूसेक पानी नहीं मिला है तथा 1000 से 1300 क्यूसेक के बीच ही पानी मिल रहा है। पूरा सिंचाई पानी नहीं मिलने के कारण गंगनहर से जुड़ी वितरिकाओं का रेगुलेशन सिस्टम बिगड़ा हुआ है तथा किसानों की लगातार तीन-तीन सिंचाई बारियां पिट रही हैं। यही स्थिति रही तो फसलें बर्बाद हो जाएंगी तथा उत्पादन घटेगा। इसका सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।
मावठ हुई तो गेहूं व जौ फसलों में होगी सिंचाई पानी की मांग पूरी: किसान गेहूं व जौ की फसल के अच्छे पकाव के लिए अब ईश्वर से बारिश की प्रार्थना कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि ऐसे समय में मावठ होती है तो गेहूं व जौ फसल में सिंचाई पानी की मांग पूरी होगी तथा मौसम भी फसलों के अच्छे पकाव के लिए अनुकूल बना रहेगा। बारिश नहीं होती है तथा नहर से पूरा सिंचाई पानी नहीं मिला तो फसलों का बर्बाद होना तय है। वर्तमान में जौ में एक गेहूं में दो सिंचाई सुविधाओं की आवश्यकता है।
^ आरडी 45 से पंजाब के अधिकारी अपनी ईस्टर्न में भी पानी ले रहे हैं। इस कारण हमें पूरा पानी नहीं मिल रहा है। पंजाब के अधिकारियों से पानी बढ़वाने के लिए जल संसाधन विभाग के अधिकारी वार्ता कर रहे हैं, लेकिन यही स्थिति बनी रही तथा पूरा पानी नहीं मिला तो फसलों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ना तय है।
