
हनुमानगढ़। गांव रामसरा में महाराजा गंगासिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धा और सम्मान के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। गांव के एकमात्र महाराजा गंगासिंह चौक पर ग्रामीणों ने एकत्र होकर महाराजा गंगासिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और “महाराजा गंगासिंह अमर रहें” के जयघोष लगाए। कार्यक्रम के दौरान पूरे गांव में राष्ट्रनिर्माता महाराजा गंगासिंह के प्रति गहरी श्रद्धा और सम्मान का वातावरण देखने को मिला।
पूर्व जिलाध्यक्ष देवेन्द्र पारीक ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि महाराजा गंगासिंह का योगदान हनुमानगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने कहा कि महाराजा गंगासिंह की दूरदर्शी सोच और विकासपरक नीतियों के कारण आज हनुमानगढ़ क्षेत्र की भूमि सिंचित, उपजाऊ और खुशहाल बन सकी है। गंग नहर परियोजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक योजना ने रेगिस्तानी क्षेत्र को हरियाली में बदल दिया और हजारों किसानों के जीवन में समृद्धि लाई।
भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष महेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि महाराजा गंगासिंह केवल एक शासक नहीं थे, बल्कि वे जनकल्याण को सर्वोपरि रखने वाले दूरदर्शी नेता थे। शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और प्रशासनिक सुधारों में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे महाराजा गंगासिंह के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महाराजा गंगासिंह की नीतियों के कारण आज यह क्षेत्र कृषि, व्यापार और सामाजिक विकास की दिशा में आगे बढ़ सका है। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों की पुण्यतिथि पर उनके योगदान को याद करना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से पुष्प अर्पित कर उनके चित्र के समक्ष नमन किया। कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस मौके पर गांव के गणमान्य नागरिक, बुजुर्ग, युवा एवं महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने महाराजा गंगासिंह के आदर्शों पर चलने और क्षेत्र के विकास में योगदान देने का संकल्प लिया। इस मौके पर देवेन्द्र पारीक, हरदीप सिंह रोड़ीकपूरा, गजेन्द्र सिंह, शैरी सिंह, राहुल शर्मा, सुशील सारस्वत, प्रेम सिंह शेखावत, उदयभान सिंह राठौड़, भगवानसिंह खुड़ी, विकास भग्गु, निहालचंद वर्मा, पवन स्वामी, लक्ष्मणी स्वामी, गुरसेवक सिंह, सोनी वर्मा, कालुराम स्वामी, डॉ. विशाल कटारिया, कुलदीप सिंह, हरजीत सिंह, गुरमेल सिंह, सुखवीर सिंह, पंकज, राजु जिनागल व अन्य ग्रामीण मौजूद थे।
