
श्रीगंगानगर। झालावाड़ जिले के मनोहरथाना क्षेत्र के पिपलोदी गांव में जुलाई 2025 को एक सरकारी स्कूल की इमारत गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई थी। इसके बाद प्रदेश सरकार के निर्देश की पालना में शिक्षा महकमें ने आनन-फानन में विद्यालयों का सर्वे करा, जर्जर घोषित हो चुके बच्चों को अन्य विद्यालयों या धर्मशालाओं में शिफ्ट भी कर दिया। लेकिन जैसे ही सरकार ने नया शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू करने की घोषणा की, तो शिक्षा विभाग की परेशानी बढ़ गई।
श्रीगंगानगर जिले की बात करें तो जिले में कुल 1926 सरकारी विद्यालय हैं। इनमें से 115 विद्यालयों को जर्जर घोषित कर दिया गया है। अब विभाग इन जर्जर स्कूलों में से करीब 55 विद्यालय फिर से सुचारू बनाने के प्रयास में जुट गया है। बाकायदा इसके लिए टीम बनाई गई है। पीडब्ल्यूडी के अफसरों के साथ पुन: मौका मुआयना किया जाएगा। यदि विद्यालय में रिपेयर से कक्ष बैठने लायक हो जाते हैं तो इन विद्यालयों को जर्जर सूची से बाहर कर दिया जाएगा।
एक ई छोटी के सतगुरु कॉलोनी स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय को विभाग ने जर्जर घोषित कर यहां पढ़ रहे 127 बच्चों को विद्यालय से 4 किमी. दूरी पर बारहमासी नहर के पास वाले राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट कर दिया था। लेकिन इसके बाद 30 फीसदी भी बच्चे इस विद्यालय में नहीं गए। दो-तीन बच्चों को सड़क दुर्घटना चोटें आई, इसके बाद परिजनों ने हंगामा किया।
जिला प्रशासन ने एआरएस में अस्थायी जगह दी, लेकिन एआरएस ने नहीं बैठने दिया। ठीक इसी तरह अन्य जर्जर हो चुके विद्यालयों के बच्चों की स्थिति है। बच्चे या तो खुले मंे पढ़ने को विवश हैं या अनेक ने विद्यालय ही जाना बंद कर दिया गया है। कहां कितने स्कूल जर्जर ^श्रीगंगानगर जिले में 100 इंजीनियरों की टीम से स्कूलों का सर्वे कराया गया। 33-34 विद्यालयों में अधिक जर्जर अवस्था मिली, लेकिन विभाग ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता में रखते हुए सभी 115 विद्यालयों को जर्जर घोषित कर दिया। फिलहाल जर्जर विद्यालयों के बच्चों को पास के अन्य विद्यालयों में शिफ्ट किया गया है। जर्जर विद्यालयों का भी फिर से सर्वे कराया जा रहा है। रिपेयरिंग कर दुरुस्त होते हैं तो ठीक करवाया जाएगा।
