
हनुमानगढ़ । अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीआईटीयू) के नेतृत्व में मजदूरों ने जिला कलेक्ट्रेट के सामने एक सभा की। इस दौरान श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, चार लेबर कोड रद्द करने और मजदूर आंदोलनों में पुलिस हस्तक्षेप रोकने की मांग की गई।
संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि मजदूरों ने वर्षों के संघर्ष के बाद श्रम कानूनों के माध्यम से 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे मनोरंजन का अधिकार हासिल किया था। हालांकि, हाल के वर्षों में इन श्रम कानूनों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि 21 नवंबर 2025 को लागू किए गए नए श्रम संहिताओं से मजदूरों के अधिकारों में कटौती हुई है। इससे पूंजीपतियों को लाभ मिल रहा है, जबकि श्रमिकों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
सीआईटीयू ने स्पष्ट किया कि देश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूर आंदोलन अचानक नहीं हो रहे हैं। ये लंबे समय से चली आ रही वेतन असमानता, ठेका प्रथा, असुरक्षित कार्य परिस्थितियों और बढ़ती महंगाई के खिलाफ एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।
संगठन ने आरोप लगाया कि इन आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिस दमन, गिरफ्तारियां और मजदूर नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। सीआईटीयू ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में कई प्रमुख मांगें शामिल हैं। इनमें गिरफ्तार श्रमिकों और ट्रेड यूनियन नेताओं की बिना शर्त रिहाई, झूठे मुकदमों की वापसी, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर कम से कम 26 हजार रुपए प्रति माह करना, 8 घंटे कार्यदिवस का सख्ती से पालन और ओवरटाइम का उचित भुगतान शामिल है।
इसके अतिरिक्त ज्ञापन में ईएसआई-पीएफ सहित सभी वैधानिक सुविधाएं सुनिश्चित करने, ठेका प्रथा समाप्त कर नियमितीकरण करने, कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन करने और आवश्यक वस्तुओं, विशेषकर एलपीजी, को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मजदूरों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

