
श्रीगंगानगर (भटनेर एक्सप्रेस) जाब क्षेत्र में गंगनहर में पानी चोरी और भारी कमी से आक्रोशित किसान, एक जुलाई को कलेक्ट्रेट घेराव का ऐलान जाब क्षेत्र में गंगनहर में पानी चोरी और भारी कमी से आक्रोशित किसान, एक जुलाई को कलेक्ट्रेट घेराव का ऐलानजाब क्षेत्र में गंगनहर में पानी चोरी और भारी कमी से आक्रोशित किसान, एक जुलाई को कलेक्ट्रेट घेराव का ऐलानगंगनहर नहर में पंजाब में लगातार हो रही पानी की चोरी और अपर्याप्त जल आपूर्ति ने क्षेत्र के किसानों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। बिजाई के पीक सीजन में पानी की मात्रा घटकर मात्र 1000 क्यूसेक रह जाने से फसलें सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में आज सैकड़ों किसानों ने जिला कलेक्ट्रेट के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासन से तुरंत समाधान की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 1 जुलाई को कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा।ग्रामीण मजदूर किसान समिति के प्रदेशध्यक्ष नेता रणजीतसिंह राजू ने प्रदर्शन के दौरान बताया कि गंगनहर में हाल ही में पानी की सप्लाई घटकर 1000 क्यूसेक रह गई थी। अभी भी जल स्तर में उतार-चढ़ाव जारी है जिसके कारण किसानों को अपना पूरा हकदार पानी नहीं मिल पा रहा है। बिजाई का महत्वपूर्ण समय चल रहा है लेकिन कई बारियां पूरी तरह छूट रही हैं। समय पर सिंचाई न हो पाने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। माकपा के वरिष्ठ नेता श्योपतराम मेघवाल ने प्रदर्शन के दौरान बताया कि नहर की बदहाली भी एक बड़ी समस्या बन गई है। गंगनहर के दोनों किनारों पर बरम यानी घास-फूस 10 से 15 फुट तक बढ़ गया है। पंजाब को नहर सफाई के लिए दिए गए पैसे को दो साल से ज्यादा समय बीत चुका है लेकिन आरडी 200 से आरडी 368 तक अभी तक कोई सफाई कार्य नहीं कराया गया है। इससे नहर अपनी पूरी क्षमता से पानी नहीं ले पा रही है। अखिल भारतीय किसान सभा के प्रवक्ता रवींद्र तरखान ने आरोप लगाया कि पंजाब के हिस्से और राजस्थान में खखा हेड से नीचे लगातार पानी की चोरी हो रही है। किसानों ने खुद कई चोरी के मामले पकड़े और विभाग को सूचित भी किया लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हाइड्रोलिक सर्वे की मांग लंबित पड़ी हुई है और रिपोर्ट तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। क्षेत्र की सभी वितरिकाओं की सफाई न होने के कारण टेल एंड तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है जिससे दूर-दराज के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि सिंचाई विभाग आबियाना और सिंचाई कर तो नियमित रूप से वसूलता है लेकिन जल उपयोक्ता संगमों के खातों में किसानों का हिस्सा राशि नहीं डाली जा रही है। इससे नहरों की सफाई और रखरखाव पूरी तरह ठप हो गया है।प्रदर्शन में किसानों ने अन्य समस्याएं भी उठाईं। सरकार द्वारा ड्रम-केन में डीजल देने की व्यवस्था बंद कर दी गई है जिससे दूर-दराज के किसानों को ट्रैक्टर लेकर मंडी जाना पड़ रहा है। बिजाई के मौसम में खाद की उपलब्धता बाजार में काफी कम है। साथ ही किसानों के घरों में अभी भी भारी मात्रा में गेहूं पड़ा हुआ है इसलिए खरीद लक्ष्य बढ़ाने और खरीद तारीख बढ़ाने की मांग की गई है।किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इन समस्याओं पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। 1 जुलाई को कलेक्ट्रेट घेराव का कार्यक्रम तय कर लिया गया है जिसमें बड़े स्तर पर किसान जुटने वाले हैं।
