
आंदोलन की चेतावनी, छात्रों में भारी गुस्सा
श्रीगंगानगर (भटनेर एक्सप्रेस) महाराजा गंगासिंह यूनिवर्सिटी, बीकानेर द्वारा लाए गए नए परिणाम संशोधन नियम-2026 का विरोध करते हुए एनएसयूआई कार्यकर्ताओं और छात्रों ने सेठ गिरधारीलाल बिहाणी स्नातकोत्तर महाविद्यालय (एसडी बिहाणी कॉलेज) सहित अनेक महाविद्यालयों में आज जोरदार प्रदर्शन किया।एसडी बिहाणी कॉलेज में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।एनएसयूआई जिलाध्यक्ष ईशानवीर मान ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन का यह नया नियम पूरी तरह कानूनन गलत है। इसे तुगलकी फरमान की तरह छात्रों पर थोप दिया गया है। एनएसयूआई इसकी कड़ी निंदा करती है। उन्होंने बताया कि नए नियम के अनुसार स्नातक या स्नातकोत्तर परीक्षा में किसी भी विषय में सप्लीमेंट्री आने पर छात्र आगामी कक्षा में एडमिशन नहीं ले पाएगा। उसे सप्लीमेंट्री क्लियर करने के लिए 6 महीने इंतजार करना पड़ेगा। इससे हजारों छात्रों की डिग्री पूरी करने में 2-3 साल की जगह 5 साल लग जाएंगे। ईशानवीर मान ने कहा कि-जब-जब प्रशासन डरता है, पुलिस को आगे करता है। लेकिन छात्र डरने वाले नहीं हैं। जब तक यह फरमान वापस नहीं लिया जाता हम विरोध-प्रदर्शन जारी रखेंगे। एनएसयूआई ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उच्च शिक्षा मंत्री और यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस विवादित नियम को तुरंत वापस नहीं लिया तो जिलेभर में छात्र आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। दर्शन में जिला उपाध्यक्ष सम्यक भादू, महासचिव वरजिन्द्रसिंह, सचिव यश गोयल, दीपांशु वर्मा, जितेन्द्र भाटी, कृष्ण शर्मा, आयुष नारंग, पारस शर्मा, युवराज अग्रवाल, रमन सुथार, काव्य कथूरिया सहित एनएसयूआई के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहे।प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था, लेकिन कॉलेज बंद करवाने की कोशिश के दौरान पुलिस ने जिला अध्यक्ष ईशानवीर मान सहित आधा दर्जन से अधिक पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर जवाहरनगर थाने ले गई। छात्रों ने पुलिस वाहन के पीछे भागते हुए भी विरोध जताया। बाद में छात्रों को छोड़ दिया गया। जवाहरनगर थाना पुलिस द्वारा छात्रों को छोड़ देने के बाद भी प्रदर्शन रुका नहीं इसके बाद जिला अध्यक्ष ईशानवीर मान के नेतृत्व में डॉ भीमराव अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय, खालसा कॉलेज और डीएवी कॉलेज में भी प्रदर्शन किए।छात्रों का कहना है कि न तो यूनिवर्सिटी ने पूर्व सूचना दी और न ही छात्रों से चर्चा की,अचानक नियम थोप दिया गया। फिलहाल आगे की रणनीति पर एनएसयूआई विचार कर रही है।
