
कैडर पुनर्गठन से 403 उच्च पद सृजित
श्रीगंगानगर (भटनेर एक्सप्रेस) वर्षों से पदोन्नति के अवसर न मिलने की वजह से निराशा में जी रहे राजस्थान पुलिस के तकनीकी संवर्ग के कर्मियों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। राज्य सरकार ने तकनीकी संवर्ग में व्यापक कैडर पुनर्गठन करते हुए 403 उच्च पद सृजित कर दिए हैं। इस फैसले से अब चालक, घुड़सवार और बैंड शाखाओं के कर्मियों को भी सिविल संवर्ग की तरह समयबद्ध पदोन्नति मिल सकेगी।गृह विभाग ने 23 जून को इस संबंध में स्वीकृति आदेश जारी किया है। इस पुनर्गठन को पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा की पहल का नतीजा माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजस्थान पुलिस बल को आधुनिक, दक्ष और सुदृढ़ बनाने के निरंतर प्रयासों के तहत यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इससे तकनीकी शाखाओं की कार्यक्षमता और सेवा गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। आगे भी कार्मिक कल्याण और संगठनात्मक सुधार के प्रयास जारी रहेंगे।तकनीकी संवर्ग में पहले पदोन्नति के अवसर बेहद सीमित थे। संवर्ग में नियुक्त कॉन्स्टेबल लंबे समय तक उसी पद पर कार्यरत रह जाते थे जबकि समान वर्ष में भर्ती हुए सिविल पुलिसकर्मी सहायक पनिरीक्षक बन चुके होते थे। इस असमानता ने कर्मियों के मनोबल पर गहरा असर डाला था। अब इस कैडर पुनर्गठन से स्थिति पूरी तरह बदल जाएगीचालक शाखा में सबसे अधिक 331 उच्च पद सृजित किए गए हैं। इनमें पुलिस निरीक्षक या समकक्ष के 16 पद, उप निरीक्षक या समकक्ष के 62 पद और हेड कॉन्स्टेबल के 253 पद शामिल हैं। बैंड शाखा में कुल 69 उच्च पद बढ़ाए गए हैं जिनमें उप निरीक्षक या समकक्ष के 17 पद तथा हेड कॉन्स्टेबल के 52 पद हैं। घुड़सवार शाखा में भी उप निरीक्षक या समकक्ष के 3 नए उच्च पद स्वीकृत किए गए हैं।सिविल, आईबी, दूरसंचार और आरएसी/एमबीसी चालक संवर्ग में पुलिस निरीक्षक या समकक्ष के पद 17 से बढ़कर 33 हो गए हैं। उप निरीक्षक या समकक्ष के पद 108 से बढ़कर 170 तथा हेड कॉन्स्टेबल के पद 1046 से बढ़कर 1299 कर दिए गए हैं। सिविल और आरएसी/एमबीसी बैंड में उप निरीक्षक के पद 10 से बढ़कर 27 तथा हेड कॉन्स्टेबल के पद 141 से बढ़कर 193 हो गए हैं। सिविल घुड़सवार संवर्ग में उप निरीक्षक के पद 1 से बढ़कर 4 कर दिए गए हैं।राज्य सरकार ने बजट वर्ष 2026-27 में कैडर पुनर्गठन की घोषणा की थी जिसकी समयबद्ध अनुपालना में गृह विभाग ने यह स्वीकृति प्रदान की है। इस फैसले से पुलिसकर्मियों को पदोन्नति के अधिक अवसर प्राप्त होंगे।उनका मनोबल बढ़ेगा और पुलिस की समग्र कार्यक्षमता और अधिक सुदृढ़ होगी।
