
कॉलोनाइजर तत्कालीन अच्छा से अधिकारी और भूमि शाखा प्रभारी समेत अनेक लोगों को किया गया नामजद
श्रीगंगानगर (भटनेर एक्सप्रेस) सादुलशहर में लगभग 12 वर्ष पहले बसाई गई भगतसिंह कॉलोनी के निवासियों को शुरू से ही पेयजल की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। निवासियों द्वारा जिला कलेक्टर को करीब एक महीने पहले सौंपे गए ज्ञापन के बाद गठित जांच समिति की रिपोर्ट में कई गड़बड़ियां सामने आने पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी धीरेंद्र यादव द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर कॉलोनी के कॉलोनाइजर सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार भगतसिंह कॉलोनी के निवासियों ने 19 मई को जिला कलेक्टर और सादुलशहर के उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट किया था कि उनकी कॉलोनी में प्रारंभ से ही जलदाय विभाग द्वारा पेयजल आपूर्ति नहीं की जा रही है। निवासियों ने बताया कि उन्होंने कई बार कॉलोनाइजर से अनुरोध किया था कि वे प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें, लेकिन कॉलोनाइजर द्वारा इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया।ज्ञापन प्राप्त होने पर सादुलशहर के उपखंड अधिकारी ने 3 जून को एक जांच समिति का गठन किया। समिति ने 4 जून को कॉलोनी का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपी, जिसमें बताया गया कि कॉलोनी में निजी वितरण पाइपलाइन तो बिछाई गई है, लेकिन पेयजल की आपूर्ति नहीं की जा रही है। इससे पहले कॉलोनाइजर को 22 मई को ही ज्ञापन में उल्लिखित शिकायत के संबंध में जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया गया था।जांच में यह भी सामने आया कि कॉलोनाइजर ने 27 जनवरी 2015 को नगर पालिका के नाम एक शपथ पत्र प्रस्तुत किया था। इसमें उन्होंने वरिष्ठ नगर नियोजक बीकानेर के 8 जनवरी 2015 के पत्रांक में बिंदु संख्या 2 से 9 तक वर्णित शर्तों, राजस्थान टाउनशिप पॉलिसी 2010 तथा राजस्थान भवन विनियम 2013 के समस्त प्रावधानों का पालन करने का आश्वासन दिया था।हालांकि समिति की रिपोर्ट के अनुसार शपथ पत्र में अंकित राजस्थान टाउनशिप पॉलिसी 2010 के प्रावधानों के तहत पेयजल आपूर्ति की सुविधा आज तक कॉलोनी वासियों को उपलब्ध नहीं कराई गई है। विगत 9 जून को प्रस्तुत समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉलोनी सक्षम स्तर से अनुमोदित हो चुकी है और अनुमोदन की प्रमुख शर्तों में कॉलोनी वासियों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान था, जिसका पूर्ण पालन नहीं हुआ। राजस्थान टाउनशिप पॉलिसी 2010 के अनुसार दो हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली कॉलोनी को विकासकर्ता द्वारा 36 महीने में पूर्ण रूप से विकसित किया जाना अपेक्षित था, लेकिन 11 वर्ष 5 महीने बीत जाने के बावजूद कॉलोनी का पूर्ण विकास नहीं किया गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कॉलोनाइजर, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी,भूमि शाखा के तत्कालीन प्रभारी तथा अन्य संबंधित कर्मचारियों ने कॉलोनी से जुड़ी पत्रावली, पत्राचार और रिकॉर्ड को गायब या नष्ट कर दिया है।पुलिस ने इस पूरी रिपोर्ट के आधार पर सभी संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी पुलिस इंस्पेक्टर मलकीयतसिंह ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
