
यह बिंदु सामने आए: वोटर को कोई दस्तावेज जमा नहीं करवाना है। सिर्फ फार्म में मांगी गई डिटेल भरनी है और दो फोटो देनी हैं। 2002 की मतदाता सूची में नाम है तो हाथोहाथ मैपिंग हो सकती है, भले ही पुरानी सूची में ईपिक नंबर न हो। 2002 की सूची में नाम न होने पर माता-पिता या किसी अन्य नजदीकी रिश्तेदार के मत के आधार पर मैपिंग होगी। इसके लिए भी दस्तावेज नहीं देना है।
पुरानी सूची ऑनलाइन उपलब्ध है। बीएलओ उससे ही मिलान कर सकते हैं। खुद का या किसी भी रिश्तेदार का नाम 2002 की सूची में न होने पर मैपिंग नहीं होगी, ऐसे केस बेहद कम हैं। इसमें कोई कवर नहीं होता है तो ड्रॉफ्ट सूची के प्रकाशन के बाद दावे व आपत्तियां ली जाएंगी, दस्तावेज जमा होंगे। प्रयास यही है कि मैपिंग में अधिकांश लोग कवर हो जाएंगे। इससे दस्तावेजों की फोटोकॉपी आदि से बचा जा सकेगा। यह आ रही है दिक्कत: मतदाताओं का सहयोग कम मिल रहा है। फॉर्म बंट चुके हैं। बीएलओ फॉर्म व फोटो के लिए बार-बार चक्कर निकाल रहे हैं। वोटर्स ने खुद ही मन में धारणा बना रखी है कि पुराना ईपिक नंबर नहीं है या दस्तावेज नहीं है, जबकि इनकी जरूरत नहीं है। खुद ऑनलाइन मैपिंग में थोड़ी दिक्कत हो सकती है क्योंकि वोटर आईडी और आधार कार्ड में िदए गए नाम में अंतर है। उधर, बीएलओ के पास फॉर्म जमा करवाने पर ऐसी दिक्कत नहीं है।
नाम में अंतर होने पर भी फॉर्म जमा हो सकता है। अभी वोटर को क्या उपलब्ध करवाना है: एसआईआर के तहत दिए गए गणना प्रपत्र का फॉरमेट बेहद आसान है। प्रपत्र के ऊपरी भाग में मतदाता को अपनी नवीनतम फोटो चिपकाकर सामान्य सूचना देनी है। मतदाता का नाम 2002 की सूची में है तो नीचे के बाएं हिस्से में अपनी जानकारी दर्ज करनी होगी। उस समय का ईपिक नंबर नहीं हो तो भी फार्म भरा जा सकता है लेकिन विधानसभा क्षेत्र, भाग संख्या व क्रम संख्या लिखनी होगी। वोटर 2002 की सूची में नहीं था तो माता-पिता, दादा-दादी आदि किसी नजदीकी रिश्तेदार की सूचना भरनी होगी। वोटर या उसके रिश्तेदार का नाम 2002 की वोटर सूची में बाहरी राज्य में था तो उसकी डिटेल भरी जा सकती है। मौके पर पहुंचे मास्टर ट्रेनर विकेश कुमार ने बताया कि एप में हाथोंहाथ डिजिटलाइजेशन के फीचर्स उपलब्ध हैं। फोटो खींचकर भी अपलोड की जा सकती है।
यहां काम पूरा कर बीएलओ रोहित कुमार पास के ही घर में गए। मौके पर मौजूद वोटर ने रविवार को फार्म जमा करवाने की बात कही। पता चला कि इस घर से फॉर्म कलेक्ट करने के लिए बीएलओ कई बार जा चुके हैं लेकिन फॉर्म जमा नहीं करवाया जा रहा। फील्ड में बीएलओ और अन्य कर्मचारियों के सामने यही सबसे बड़ी समस्या है। एक अन्य घर में एक युवती का फॉर्म लिया गया। युवती स्वयं घर पर नहीं थी तो फोटो और फॉर्म परिजनों ने दिया। परिवार के अन्य चार लोगों के फॉर्म पहले ही जमा हो चुके थे। बीएलओ ने फार्म अपलोड करने की कोशिश की तो तुरंत नहीं हुआ। विकेश कुमार ने बताया कि युवती का नाम 2002 की सूची में नहीं होने के चलते अन्य परिजन के डेटा के आधार पर मैपिंग होगी। इसमें बीएलओ स्वयं परिजन का डेटा फीड करेंगे, मैपिंग हो जाएगी।
इसके बाद नजदीक के घर में रिंग की तो बुजुर्ग बाहर आए। बीएलओ ने बताया इनके बेटे विदेश में रहते हैं। बेटे का वोट पुरानी आबादी क्षेत्र में ही है जबकि बुजुर्ग का वोट गांव में है। बुजुर्ग ने बताया कि फोटो नहीं है इसलिए वोट एक-दो दिन में जमा करवाएंगे। भास्कर संवाददाता | श्रीगंगानगर निर्वाचन आयोग की ओर से जारी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। इसके लिए गणना प्रपत्र घर-घर पहुंचने के बाद भी लोग मतदाता सूची से नाम कटने को लेकर आशंकित हैं।
फील्ड में काम कर रहे बीएलओ के सामने भी कई तरह की परेशनियां आने की बात कही जा रही है। राष्ट्रीय महत्व के इस कार्यक्रम की ग्राउंड रियलिटी जानने के लिए दैनिक भास्कर संवाददाता ने पुरानी आबादी क्षेत्र में बीएलओ रोहित कुमार के साथ रहकर ग्राउंड रियलिटी को समझने की कोशिश की। बीएलओ रोहित कुमार अपने सहयोगियों के साथ मतदाताओं के घर पहुंचे तो अलग-अलग तरह की स्थितियां सामने आईं। हालांकि कहीं भी यह नहीं लगा कि वोटर्स के नाम मतदाता सूची से कट सकते हैं या उनके लिहाज से किसी तरह की कोई दिक्कत है। दोपहर करीब 12:45 पर ग्रेड थर्ड टीचर बीएलओ रोहित कुमार मिले।
रोहित कुमार गंगानगर विधानसभा क्षेत्र की भाग संख्या 37 का काम संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके साथ एक अन्य टीचर शशिकला व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता वीना कुमारी सहयोगी के तौर पर काम कर रही हैं। सबसे पहले ओसवाल वाटिका स्थित एक मकान में एसआईआर के काम को देखा। यहां वोटर सुमित्रा देवी के वोट की मैपिंग की जा रही थी। सुमित्रा देवी का वोट 2002 की मतदाता सूची में था।
एड्रेस भी नहीं बदला तो मैपिंग का काम हाथोंहाथ ही हो गया। इसमें मुश्किल से दो-तीन मिनट का ही समय लगा। इस परिवार में सात वोटर हैं। सातों वोटों की मैपिंग आराम से हो गई। सुमित्रा देवी से फोटो लेने की आवश्यकता भी नहीं थी। एप में उपलब्ध फीचर के माध्यम से बीएलओ ने उनका फोटो लिया और रिकॉर्ड का मिलान हो गया। मतगणना प्रपत्र का फॉरमेट भरते बीएलओ
