
श्रीगंगानगर शहर में मंगलवार को विवाह पंचमी के अवसर पर ऐतिहासिक आयोजन होने जा रहा है। सूरतगढ़ रोड स्थित 35 साल पुराने अन्नक्षेत्र श्रीराम मंदिर में पहली बार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाहोत्सव मनाया जाएगा। यह विशेष उत्सव सर्वार्थ सिद्धि योग और हर्षण योग जैसे अत्यंत शुभ संयोगों के बीच संपन्न होगा। इस उत्सव को लेकर भक्तों में जबरदस्त उत्साह है।
मंदिर के प्रधान अजय कृष्ण स्वामी के अनुसार विवाहोत्सव की शुरुआत बारात के साथ होगी, जो सूरतगढ़ रोड स्थित मंदिर परिसर में निकाली जाएगी। इस बारात में भक्तों को आकर्षक झांकियां, रामायण की झलकियां देखने को मिलेंगी, साथ ही नृत्य दल और भजन मंडलियों की प्रस्तुतियां भी होंगी। यह आयोजन भक्तों को आध्यात्मिक आनंद से सराबोर कर देगा। मंदिर में शाम 8 से रात 11 बजे के बीच प्रभु राम और माता सीता की जयमाला का आयोजन होगा, जिसके बाद मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद महाआरती की जाएगी। मान्यता है कि इस दिन जो भी अविवाहित युवतियां व्रत रख प्रभु श्रीराम और माता जानकी की भाव पूर्वक पूजा-आराधना करतीं हैं, उन्हें मन मुताबिक योग्य पति की प्राप्ति होती है। वहीं, सुहागिन स्त्रियों का दांपत्य जीवन सदा खुशहाल रहता है। विवाहोत्सव के लिए मंदिर परिसर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है और शाम को एक विशेष दीपमाला कार्यक्रम होगा। इस दौरान मंदिर और उसके आसपास 1100 दीप प्रज्जवलित किए जाएंगे। इसके बाद आतिशबाजी भी की जाएगी।
वहीं, पंडित मनोज दुबे के अनुसार विवाह पंचमी तिथि 24 नवंबर को रात 9:40 बजे शुरू होगी, समाप्ति 25 नवंबर को रात 10:58 बजे होगी। उदयातिथि के अनुसार विवाह पंचमी 25 नवंबर को ध्रुव योग, रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग व हर्षण योग में मनाई जाएगी। इस दिन माता सीता को सुहाग की चीजें अर्पित करनी चाहिए। बालकांड की विवाह कथा का श्रवण करना चाहिए। बालकांड में भगवान श्री राम और सीता के विवाह का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का संयोग रहेगा। वृंदावन के पंडित मारूति नंदन जी शास्त्री के सान्निध्य में आज शाम को होगी भजन संध्या : मंदिर में विवाह पंचमी पर श्रीराम-जानकी विवाहोत्सव भजन संध्या रखी गई है। श्रीधाम वृंदावन के पंडित मारूति नंदन जी शास्त्री के सान्निध्य में रात्रि 8 बजे से 11 बजे तक होने वाले इस विशिष्ट आयोजन की तैयारियां चल रही हैं।
अजय कृष्ण स्वामी ने बताया कि अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय भी यहां दस दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन किया गया था। अब अयोध्या में ध्वजारोहण के अवसर पर दिव्य भजन संध्या रखी गई है। इसमें इलाके की प्रमुख सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारिक संस्थाओं की सहभागिता भी रहेगी। आयोजन के महत्व को देखते हुए इसे यादगार बनाने के लिए भक्तों की टोलियां जुटी हुई हैं।
सेवादार अभय स्वामी ने बताया कि इस दिन भगवान श्रीराम को विशेष तिलक लगाया जाएगा। इसके िलए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। यह तिलक भगवान राम के सूर्यवंशी कुल और उनकी दिव्यता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि श्रीराम भक्ति के लिए 12 तरह के तिलक लगाए जाते हैं। शरीर के 12 हिस्सों पर तिलक लगाने की परंपरा ललाट, पेट, हृदय, गला, पेट के दोनों तरफ, भुजाओं की मूल में यानी कंधे के पास, दोनों भुजाओं पर, मेरुदंड यानी रीढ़ की हड्डी पर और गले के पीछे।
