
श्रीगंगानगर । गुरु श्री रविदास जी महाराज के 649वें
प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में शनिवार को शहर में श्रद्धा और उल्लास के साथ शोभा यात्रा निकाली गई। फूलों से सुसज्जित गुरु महाराज की पालकी साहिब के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
दोपहर 1:30 बजे कस्तूरी लाल जस्सल एवं श्रवण कटारिया ने पालकी साहिब को हरी झंडी दिखाकर शोभायात्रा को रवाना किया। यात्रा के पूरे मार्ग में विभिन्न संगठनों और श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर गुरु महाराज का अभिनंदन किया। शोभायात्रा में आध्यात्मिक और साहसिक प्रदर्शनों का संगम देखने को मिला। इस दौरान बाबा चरणजीत सिंह (जालंधर), बाबा गुरप्रीत सिंह और मुख्य ग्रंथी बाबा मनोहर सिंह (पिंटू) के रागी जत्थों ने गुरुवाणी के गुणगान से संगत को निहाल किया।
वहीं, बाबा सुखा सिंह और बाबा महताब सिंह (8 ए वाले) की गतका पार्टी ने अपने हैरतअंगेज करतबों से सबका मन मोह लिया। शोभायात्रा का स्वागत कर विभिन्न समाजों ने आपसी भाइचारे का संदेश दिया। इस शोभयात्रा ने 5 घंटे में करीब 10 किलोमीटर का सफर तय किया। यात्रा के स्वागत के लिए लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। मुख्य समारोह आज होगा : मीडिया प्रभारी रणजीत सहजल ने बताया कि शोभायात्रा के दौरान सेवा का जज्बा देखने को मिला। एक पिता एकस के वारिस संस्था ने कड़ी-चावल का लंगर, बंत सिंह ने हलवा-चना का प्रसाद वितरित किया। रेलवे स्टेशन रोड पर केलों व समोसे का लंगर लगाया गया। केलों के वितरण में लवप्रीत सिंह ने सेवा दी। सहजल के मुताबिक 1 फरवरी को रविदास नगर स्थित श्री गुरु रविदास गुरुघर में मुख्य समारोह का आयोजन किया जाएगा। यह समारोह सुबह 8 बजे कीर्तन दरबार से शुरू होगा। इसके बाद सुबह 11 बजे सहज पाठ के भोग डाले जाएंगे, फिर गुरु का अटूट लंगर बरताया जाएगा।
इस शोभायात्रा का मेघवाल समाज, धानक समाज, मजहबी सिख समाज, जिला वाल्मीकि सभा, गुरुद्वारा सिंह सभा, जीनगर समाज, खटीक समाज और मुस्लिम समाज सहित सर्वसमाज की ओर से करीब 20 जगहों पर स्वागत किया गया। इस दौरान पुलिस प्रशासन और यातायात पुलिस का सहयोग रहा। एक फरवरी को होने वाले कार्यक्रम को लेकर तैयारी पूरी हो चुकी है। गुरुद्वारा को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। बता दें कि गुरु रविदास ने सामाजिक समानता, प्रेम और आपसी भाईचारे का संदेश दिया था, जिसे याद करते हुए शोभायात्रा में भजनों का गायन किया गया। कस्तूरी लाल जस्सल ने कहा कि संत रविदास ने ऐसे समाज और राज्य की कल्पना की थी, जहां कोई भी प्राणी भूखा न रहे, सभी को भरपेट भोजन मिले और छोटे-बड़े का कोई भेदभाव न हो। भगवान ने सभी को समान बनाया है, लेकिन मनुष्य ने ही भेदभाव की दीवारें खड़ी कर समाज को विभाजित कर दिया है।
