
श्रीगंगानगर।पूर्व पार्षद अधिवक्ता सुरेंद्र स्वामी, जो पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं, ने आज सोशल मीडिया के माध्यम से श्रीगंगानगर शहर की बदहाल विकास स्थिति पर एक विस्तृत बयान जारी किया है। उन्होंने नगर विकास न्यास की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 1981-82 में लागू मास्टर प्लान के बावजूद शहर आज भी विकास की राह पर नहीं बढ़ पा रहा है।
श्री स्वामी ने अपने बयान में कहा कि नगर विकास न्यास का गठन होते ही शहर के विस्तार के लिए मास्टर प्लान तैयार किया गया था। न्यास का मूल उद्देश्य शहर के आसपास की जमीन अधिग्रहण (अवाप्त) करना और मास्टर प्लान के अनुसार व्यवस्थित बसावट सुनिश्चित करना था। मास्टर प्लान में चौड़ी सड़कें, पार्किंग स्थल, पार्क, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, खेल मैदान, श्मशान घाट आदि की जगहें पहले से तय की गई थीं। लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी।
उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा-मास्टर प्लान की सड़कों में महाराजा जस्सासिंह मार्ग का नाम लिया जा सकता है, जहां स्थानीय लोगों के लंबे संघर्ष के बाद ही डिवाइडर वाली सड़क नक्शे से धरातल पर उतरी। आवासीय कॉलोनियों की बात करें तो सद्भावनानगर और गौतम बुद्धनगर की बदहाली किसी से छुपी नहीं है। हां, स्वर्गीय पूर्व मंत्री राधेश्याम गंगानगर ने जवाहरनगर और सुखड़ियानगर जैसी बेहतरीन आवासीय कॉलोनियां विकसित कर न्यास के गठन का उद्देश्य पूरा करने का ईमानदार प्रयास ही नहीं किया बल्कि बड़ी सूझबूझ से उनको सिरे भी चढ़ाया।
श्री स्वामी ने आरोप लगाया कि नगर विकास न्यास के अध्यक्ष और ट्रस्टी मुख्य रूप से राजनीतिक लाभ के लिए नालियों व पुलियों का निर्माण कर अपनी पकड़ मजबूत करने में लगे रहे। जमीन अधिग्रहण और नियोजित विकास की बजाय उन्होंने अपनी राजनीतिक छवि बनाने पर ज्यादा ध्यान दिया। परिणामस्वरूप आज श्रीगंगानगर शहर के पास विकास के लिए कोई सरकारी भूमि शेष नहीं बची है। उन्होंने कहा कि शहर को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए सरकारी भूमि का होना अत्यंत आवश्यक है।
पूर्व पार्षद ने हनुमानगढ़ शहर का उदाहरण देते हुए कहा-श्रीगंगानगर से अलग हुए हनुमानगढ़ शहर ने आज कितनी तरक्की की है, यह सभी देख रहे हैं, जबकि वहां पर श्रीगंगानगर की तरह नगर विकास न्यास (यूआईटी) भी नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभी भी समय है। श्रीगंगानगर को विकास की राह पर लाने के लिए पहला और अहम कदम शहर के आसपास की जमीनों का मास्टर प्लान के तहत निष्पक्ष तरीके से अधिग्रहण शुरू करना चाहिए।अधिवक्ता सुरेंद्र स्वामी का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बन गया है। शहरवासी लंबे समय से नियोजित विकास की मांग कर रहे हैं और इस बयान को उसी दिशा में एक मजबूत आवाज के रूप में देखा जा रहा है।

