
श्रीगंगानगर (भटनेर एक्सप्रेस) मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रबी विपणन सीजन 2026-27 के लिए गेहूँ खरीद की अवधि 19 जून तक बढ़ाने का ऐलान किया है। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद लक्ष्य को 23.50 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 28.50 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। सरकार इसे किसानों के हित में बड़ा राहत भरा फैसला बता रही है, लेकिन श्रीगंगानगर जिले के घड़साना इलाके के जागरूक किसान गुरविंदरसिंह जाखड़ ने मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के कमेंट बॉक्स में इन दावों की जमीनी हकीकत सामने रख दी है। किसान गुरविंदरसिंह जाखड़ ने लिखा है कि-गेहूँ खरीद के लिए जो वेबसाइट 25 मई को बंद होनी थी, उसे खाद्य आपूर्ति विभाग ने 16 मई को ही बंद कर दिया। इसके कारण हजारों किसान पंजीकरण करने से वंचित रह गए और अब वे अपनी उपज बेचने में असमर्थ हैं।हनुमानगढ़ जिले में जिला कलक्टर द्वारा जारी आदेश के कारण किसानों को भुगतान में काफी देरी हो रही है। उन्हें अतिरिक्त प्रमाण-पत्र भरने पड़ रहे हैं, जबकि राज्य सरकार दावा कर रही है कि भुगतान मात्र 48 घंटे में किया जाएगा। बढ़े हुए लक्ष्य के बावजूद कई खरीद केंद्रों पर अभी तक बारदाना नहीं पहुंचा है, जिससे खरीद प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है। श्री जाखड़ के अनुसार उन किसानों की सबसे बड़ी समस्या है,जो पहले कुछ गेहूँ बेच चुके हैं। उनके पास बचा हुआ गेहूँ अब बेचने में दिक्कत आ रही है। विभाग के एक आदेश के कारण वे दोबारा अपना बचा हुआ गेहूँ नहीं बेच पा रहे हैं, जिससे इन किसानों से बड़ा अन्याय हो रहा है।इसके अलावा कई किसानों ने बायोमेट्रिक करवा लिया था, लेकिन बारदाना की कमी या अन्य जरूरी कामों के कारण गेहूँ तुल नहीं सका। परिणामस्वरूप उनका पंजीकरण निरस्त कर दिया गया। गुरविंदरसिंह जाखड़ ने मुख्यमंत्री से इन सभी मुद्दों पर तुरंत ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकार लगातार किसान हितैषी होने का दावा कर रही है, लेकिन व्यावहारिक रूप से किसानों को राहत नहीं मिल रही। ये फैसले कागजी कार्यवाही तक सीमित नजर आ रहे हैं। श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और आसपास के जिलों के हजारों गेहूँ उत्पादक किसान इस समस्या से जूझ रहे हैं। किसान संगठनों और प्रशासन से अपील की जा रही है कि बढ़ी हुई अवधि को सिर्फ ऐलान तक न रखा जाए बल्कि इन जमीनी समस्याओं का तुरंत समाधान निकाला जाए। हासिल करने का पैंतरा है या वास्तव में किसानों की समस्याओं का समाधान होगा?
