
आज सूरतगढ़ में किसानों का महापड़ाव
श्रीगंगानगर (भटनेर एक्सप्रेस) 15 जून।।इंदिरा गांधी नहर परियोजना जो राजस्थान के सूखे इलाकों के लिए जीवन रेखा मानी जाती है,अब गंभीर प्रदूषण की चपेट में आ गई है। हनुमानगढ़ जिलेके रावतसर क्षेत्र के पास स्थित पंपिंग स्टेशन से सेम और आसपास का गंदा टॉयलेट युक्त पानी सीधे मुख्य नहर में छोड़ा जा रहा है। इस पर्यावरणीय और स्वास्थ्य आपदा के खिलाफ श्री गंगानगर जिले के सूरतगढ़ उपखंड क्षेत्र में किसान नेता राकेश बिश्नोई ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कल मंगलवार को सूरतगढ़ उपखंड कार्यालय पर महापड़ाव करने की घोषणा कर दी है। किसान नेता राकेश बिश्नोई ने खुद मौके का निरीक्षण किया और बताया कि रावतसर के पास पंपिंग स्टेशन के जरिए आसपास के क्षेत्र का दूषित पानी नहर में मिलाया जा रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें नहर में गंदा पानी छोड़ने के साफ दृश्य दिख रहे हैं। यह नहर न केवल सिंचाई का प्रमुख साधन है बल्कि हजारों परिवारों का पेयजल स्रोत भी है। ऐसे में इस प्रदूषण से पूरे क्षेत्र खासकर सूरतगढ़ रावतसर और आसपास के गांवों में स्वास्थ्य संकट गहराने की आशंका है। राकेश बिश्नोई ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह लाखों लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।

लंबे समय तक दूषित पानी के उपयोग से कैंसर पेट की बीमारियां और अन्य गंभीर रोग बढ़ सकते हैं। नहर का पानी कृषि और पेयजल दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है इसलिए इस समस्या को तुरंत रोका जाना चाहिए। कुछ दिन पहले बिश्नोई ने सूरतगढ़ उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर गंदा पानी छोड़ने पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी। ज्ञापन में उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई जो क्षेत्रवासियों में रोष बढ़ा रहा है। महापड़ाव को सफल बनाने के लिए किसान नेता लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क कर रहे हैं। लोगों को इस मुद्दे की गंभीरता से अवगत कराया जा रहा है और बड़े स्तर पर आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया जा रहा है। बिश्नोई का कहना है कि यदि प्रशासन ने अभी भी ध्यान नहीं दिया तो यह मामला और बड़ा आंदोलन ले सकता है। किसानों की मुख्य मांग है कि आईजीएनपी में गंदा पानी छोड़ने पर तुरंत रोक लगाई जाए प्रदूषण के स्रोतों की जांच की जाए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही नहर के पानी की नियमित जांच और शुद्धिकरण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि क्षेत्र के स्वास्थ्य और कृषि को बचाया जा सके।यह मुद्दा न केवल स्थानीय किसानों बल्कि पूरे श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ और बीकानेर सहित पश्चिमी राजस्थान के 10 जिलों क्षेत्र के करोडों लोगों को प्रभावित कर रहा है। आईजीएनपी राजस्थान की रीढ़ है। अगर इसका पानी दूषित होता रहा तो खेती-किसानी पेयजल और सार्वजनिक स्वास्थ्य तीनों पर बुरा असर पड़ेगा।
